कोटा, 1 फरवरी 2025 – राजस्थान के कोटा जिले के सुल्तानपुर क्षेत्र में शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। दरबीजी गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में जर्जर शौचालय की दीवार ढहने से पहली कक्षा में पढ़ने वाली 6 वर्षीय मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
बच्ची मलबे में दबी, स्कूल प्रशासन करता रहा देरी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक बच्ची रोहिणी वैष्णव पुत्री सोनू वैष्णव इसी स्कूल में कक्षा एक की छात्रा थी। उसकी बड़ी बहन राधिका (8) और भाई सागर (2) भी इसी विद्यालय में पढ़ते हैं। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे रोहिणी शौचालय गई थी, तभी अचानक जर्जर दीवार भरभराकर गिर गई और मासूम बच्ची उसके नीचे दब गई।
विद्यालय के शिक्षकों ने बच्ची को अस्पताल ले जाने के बजाय पहले उसके माता-पिता को सूचना दी और उनके पहुंचने का इंतजार किया। इस बीच, बच्ची तड़पती रही और कीमती समय बर्बाद हो गया। बाद में परिजन उसे गंभीर हालत में सुल्तानपुर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से चिकित्सकों ने उसे कोटा रेफर कर दिया। कोटा में इलाज के दौरान बच्ची ने दम तोड़ दिया।
परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
मृतक बालिका के पिता सोनू वैष्णव ने विद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि “स्कूल ने कुछ देर पहले ही बेटी को मेरे मोबाइल नंबर लाने के लिए घर भेजा था। थोड़ी देर बाद हादसा हुआ, लेकिन शिक्षकों ने उसे तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय पहले मुझे फोन किया। जब मैं स्कूल पहुंचा, तब जाकर उसे अस्पताल ले जाया गया, जिससे बहुमूल्य समय नष्ट हो गया और वह दर्द से तड़पती रही।”
विद्यालय में कुल 82 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं और 7 शिक्षक कार्यरत हैं। विद्यालय के प्रधानाध्यापक अशोक पोरवाल सहित अन्य शिक्षकों ने जर्जर शौचालय के उपयोग को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।
नए शौचालय होने के बावजूद पुराने जर्जर टॉयलेट का उपयोग
गांव के उपसरपंच जितेंद्र मीणा ने बताया कि विद्यालय में दो नए शौचालय बने हुए हैं, लेकिन उनका उपयोग नहीं किया जाता। इसके बजाय, बच्चों को पुराने और जर्जर शौचालय में भेजा जाता था, जो गिरने की स्थिति में था। किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और आखिरकार यह दर्दनाक हादसा हो गया।
स्कूल प्रशासन ने क्या कहा?
विद्यालय के प्रधानाध्यापक अशोक पोरवाल ने घटना पर सफाई देते हुए कहा,
“शुक्रवार को विद्यालय का अंतिम कार्यदिवस था। लंच के बाद 5वीं तक के बच्चों की छुट्टी कर दी गई थी। छुट्टी के बाद भी कुछ बच्चे स्कूल परिसर में खेल रहे थे। संभवतः खेलते-खेलते रोहिणी टॉयलेट चली गई होगी, तभी यह हादसा हो गया। जिस टॉयलेट में यह हादसा हुआ, वह विद्यालय परिसर के दूरस्थ हिस्से में था और आमतौर पर बच्चे वहां नहीं जाते थे।”
शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश दिए
घटना के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया है। मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) गायत्री मीणा ने कहा,
“यह एक बेहद दुखद घटना है। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और विद्यालय प्रशासन से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है। दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
ग्रामीणों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
इस हादसे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल प्रशासन की लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।