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चिकित्सक ने समझौता कर दो करोड़ रूपए भी नहीं लौटाए ओर पुलिस से मिलीभगत कर परिवादी को ही बना दिया आरोपी

शिवगंज थाने में डॉ पी सी सोलंकी के खिलाफ मेडीकल स्टोर्स संचालक की ओर से दर्ज करवाए गए मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच राजीनामें के बाद लगा दी थी एफआर

धोखाधड़ी के मामले में एफआर लगने के बाद राजीनामे की शर्त के अनुसार दो करोड लौटाने से मुकर गया चिकित्सक

शिवगंज | शिवगंज थाने में डॉ पी सी सोलंकी के खिलाफ मेडीकल स्टोर्स संचालक की ओर से दर्ज करवाए गए मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच राजीनामें के बाद लगा दी थी एफआर

धोखाधड़ी के मामले में एफआर लगने के बाद राजीनामे की शर्त के अनुसार दो करोड लौटाने से मुकर गया चिकित्सक

शिवगंज पुलिस पर लगा आरोप, आरोपी चिकित्सक से मिलीभगत कर परिवादी को ही आरोपी बना धारा 217 के तहत न्यायालय में दायर कर दिया इस्तगासा सुमेरपुर। शहर के एक चिकित्सक की ओर से कथित रूप से मेडीकल स्टोर्स संचालक के साथ अमानत के तौर पर दिए गए दो करोड़ रूपए नहीं लौटा धोखाधडी करने के बहुचर्चित मामले में दबाव बनाकर समझौता करवाने के उपरांत शिवगंज पुलिस की ओर से मामले को झूठा बताते हुए एफआर लगवा परिवादी को ही आरोपी बना उसके खिलाफ न्यायालय में धारा 217 के तहत परिवाद दाखिल करने के मामले में अब नया मोड़ आ गया है।

मामले को लेकर अब परिवादी ने सिरोही पुलिस अधीक्षक के समक्ष पेश होकर समझौते के अनुसार चिकित्सक द्वारा अमानत की राशि नहीं लौटा उल्टा पुलिस ने मिलीभगत कर आरोपी बना दिए जाने की विस्तृत जांच करवा न्याय की गुहार की है।

जानकारी के अनुसार विगत जून माह में शिवगंज पुलिस को न्यायालय से मिले परिवाद में शिवगंज के चांदाना गांव निवासी रविन्द्र शर्मा पुत्र किशनलाल शर्मा ने आरोप लगाया कि उसकी मेडिकल की दुकान सुमेरपुर के डॉ पी सी सोलंकी के सप्तगिरीश्वर हार्ट एण्ड मेडिकल हॉस्पिटल में संचालित हो रही थी। इस दुकान के लिए उसने डॉ सोलंकी से एग्रीमेण्ट कर दो करोड़ रूपये अमानत के तौर पर एडवांस दिए थे। परिवाद में बताया गया था कि शपथ पत्र के अनुसार दुकान खाली करवाने पर अमानत के तौर पर दिए गए एडवांस दो करोड रूपए पुन: लौटाने थे। मगर डॉ. सोलंकी की नियत खराब हो गई और उसने दुकान खाली करवाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। यहाँ तक कि दबंगों को बुलाकर धमकाते हुए दुकान खाली कराने की कोशिश की। पुलिस ने परिवाद के आधार पर डॉ सोलंकी के खिलाफ भादंस की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया था।

दबाव देकर करवाया समझौता
आरोप है कि पुलिस थाने में दर्ज हुए इस मामले में डॉ सोलंकी ने स्वयं को फंसता देख परिवादी रविन्द्र शर्मा व उसके पिता पर दबाव बनाकर राजीनामा के लिए तैयार किया। जिस पर उसने 19 जुलाई 2024 को रविन्द्र एवं उसके पिता ने चिकित्सक के साथ पांच लोगों की साक्षी में राजीनामा कर लिया।

परिवादी ने पुलिस अधीक्षक को बताया कि 500 रूपए के नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पर नोटेरी पब्लिक की मौजूदगी में हुए राजीनामें के अनुसार दोनों पक्षों की ओर से एक दूसरे पर अलग अलग थानों में दर्ज करवाए गए मामलों को वापस लेने, डॉ सोलंकी की ओर से अमानत के तौर पर लिए गए दो करोड रूपए एक माह के भीतर लौटाने सहित जमीनों को लेकर आपसी सहमति दर्शाई गई।

परिवादी ने बताया कि समझौते के पश्चात उसने राजीनामें की शर्तो के अनुसार उसकी ओर से दर्ज करवाए गए मामलों में संबंधित थाने में राजीनामा देकर मामलों में एफआर लगवा दी, लेकिन डॉ सोलंकी ने बदनियती पूर्वक उसकी ओर से दर्ज करवाए मामलों को वापस नहीं लिया और राजीनामें की शर्तो का उल्लंघन करते हुए दो करोड़ रूपए लौटाने से भी मुकर गया।

अब पुलिस ने परिवादी को ही बना दिया आरोपी
परिवादी रविन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि उसकी ओर से डॉ सोलंकी के खिलाफ दर्ज करवाए गए मामले में पुलिस थाने में राजीनामा पेश कर एफआर लगा दिए जाने के बाद एक तो उसे डॉक्टर ने दो करोड रूपए नहीं लौटाए, दूसरा डॉ सोलंकी ने शिवगंज पुलिस के साथ सांठगांठ कर उल्टा उसे ही मिथ्यापूर्ण तरीके से दोषी बताते हुए उसके खिलाफ बीएनएस की धारा 217 में न्यायालय में इस्तगासा पेश कर दिया है। बहरहाल इस मामले में परिवादी ने पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष जांच करवा उसको न्याय प्रदान करवाने की गुहार की है।

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