- राजस्थान विधानसभा का सत्र 12 मार्च से 21 मार्च तक चलेगा, जिसमें कई अहम विधेयक पारित होंगे।
- 12 मार्च को पांच महत्वपूर्ण विधेयक, जैसे राजस्थान माल और सेवा कर (संशोधन) और राजस्थान विनियोग विधेयक पर चर्चा होगी। 13 से 18 मार्च तक विधानसभा की कार्यवाही स्थगित रहेगी, जिससे विधायकों को क्षेत्रीय फीडबैक का समय मिलेगा।

राजस्थान विधानसभा में सोमवार, 10 मार्च को कार्य सलाहकार समिति की बैठक के बाद आगामी विधायी सत्र की रूपरेखा तैयार की गई। मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने सदन में प्रतिवेदन पेश करते हुए 12 से 21 मार्च तक के कामकाज की योजना प्रस्तुत की। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित करने की प्रक्रिया होगी।
12 मार्च: पांच अहम विधेयकों पर चर्चा
12 मार्च को विधानसभा में राजस्थान माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025, भरतपुर विकास प्राधिकरण विधेयक, 2025, बीकानेर विकास प्राधिकरण विधेयक, 2025, राजस्थान वित्त विधेयक, 2025, और राजस्थान विनियोग विधेयक, 2025 को पारित किया जाएगा। ये विधेयक राज्य की वित्तीय और प्रशासनिक संरचना को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
13 से 18 मार्च: विधानसभा कार्यवाही स्थगित
कार्य सलाहकार समिति के अनुसार, 13 मार्च से 18 मार्च तक विधानसभा की कार्यवाही स्थगित रहेगी। इस दौरान विधायकों को अपने क्षेत्रों में जाकर जनता से संवाद और फीडबैक लेने का अवसर मिलेगा।
19 मार्च: भूजल संरक्षण पर अहम विधेयक
19 मार्च को विधानसभा में राजस्थान भूजल संरक्षण और प्रबंधन प्राधिकरण विधेयक, 2025 पर चर्चा होगी। यह विधेयक राज्य में जल संरक्षण के बढ़ते संकट को हल करने के लिए एक प्रभावी ढांचा तैयार करेगा। साथ ही प्रवर समिति का प्रतिवेदन भी इसी दिन सदन के पटल पर रखा जाएगा।
20 और 21 मार्च: शिक्षा और भू-राजस्व विधेयक
20 मार्च को राजस्थान विश्वविद्यालय विधियां (संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा की जाएगी। यह विधेयक विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक और शैक्षिक ढांचे में सुधार के लिए प्रस्तावित है।
21 मार्च को राजस्थान भू-राजस्व (संशोधन और विधिमान्यकरण) विधेयक, 2025 को पारित किया जाएगा। यह विधेयक राज्य की भूमि व्यवस्था को प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
विश्लेषण: विधानसभा का विधायी एजेंडा और राजनीतिक संकेत
यह सत्र आगामी विधानसभा चुनावों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। सरकार द्वारा पेश किए जा रहे विधेयक आर्थिक, प्रशासनिक और पर्यावरणीय सुधारों को प्राथमिकता देने का संकेत देते हैं। इसके अलावा, विपक्ष के लिए यह सत्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और जनता के मुद्दों को सदन में उठाने का अवसर होगा।
राजस्थान की राजनीति में यह विधायी सत्र सरकार की उपलब्धियों और विपक्ष की रणनीति के परीक्षण का मैदान साबित हो सकता है।