- नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने माधुरी दीक्षित को सेकंड ग्रेड की अभिनेत्री बताया, बयान पर विवाद हुआ।
- पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बयान की आलोचना करते हुए कहा, “हर कलाकार का सम्मान होना चाहिए।”
- IIFA अवॉर्ड्स पर 100 करोड़ रुपए खर्च के मुद्दे पर गहलोत ने सरकार से पारदर्शिता की मांग की।

राजस्थान की राजनीति में आईफा अवॉर्ड्स के आयोजन और टीकाराम जूली के माधुरी दीक्षित पर दिए बयान ने हलचल मचा दी है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस विवाद पर अपनी राय रखते हुए न सिर्फ कलाकारों का सम्मान करने की बात कही, बल्कि सरकार से खर्चों पर स्थिति स्पष्ट करने की भी मांग की है।
कलाकार का दर्जा नहीं, सबका सम्मान हो
अशोक गहलोत ने टीकाराम जूली के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फिल्मी दुनिया में कलाकारों का कोई दर्जा नहीं होता। उन्होंने कहा, “कलाकार तो कलाकार है, उसमें कोई सीनियर या जूनियर नहीं होता। सभी का सम्मान होना चाहिए। आईफा जैसे आयोजन में आए सभी कलाकारों का स्वागत करना चाहिए।”
गहलोत ने इस मुद्दे पर गहराई से बात करते हुए कहा कि आईफा आयोजन पर सरकार द्वारा किए गए खर्चों पर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा, “अगर आयोजन पर 100 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, तो जनता को इसके परिणाम दिखने चाहिए। इतने बड़े निवेश का हिसाब सरकार को देना चाहिए।”
नेता प्रतिपक्ष ने उठाए थे आईफा पर सवाल
विधानसभा में बुधवार को विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आईफा अवॉर्ड्स पर राज्य सरकार की आलोचना की थी। जूली ने कहा था कि इस आयोजन के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए, जबकि राज्य के धार्मिक स्थलों जैसे खाटू श्याम जी और गोविंद देवजी के विकास के लिए पर्याप्त बजट नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा, “सरकार करदाताओं के पैसे से इस आयोजन को बड़ा बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसमें पर्यटन को बढ़ावा नहीं मिला। शाहरुख खान के अलावा कोई बड़ा कलाकार नहीं आया। माधुरी दीक्षित अब फर्स्ट ग्रेड की अभिनेत्री नहीं हैं।”
बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा
जूली के बयान के बाद भाजपा ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और कांग्रेस पर निशाना साधा। बीजेपी प्रवक्ताओं ने इसे कलाकारों का अपमान बताते हुए कांग्रेस को घेरने की कोशिश की।
आईफा विवाद बना राजनीतिक मुद्दा
यह विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है, जहां एक तरफ गहलोत ने कलाकारों का सम्मान करने की बात कही है, उन्होंने आईफा आयोजन पर खर्च को लेकर सरकार की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए। वहीं, कांग्रेस इसे जनता के पैसे की बर्बादी बताते हुए बीजेपी को कटघरे में खड़ा कर रही है।