
सिरोही जिले के पिंडवाड़ा ब्लॉक में 108 एम्बुलेंस संचालन सेवा व्यवस्था दम तोड़ती नजर आ रही है। गंभीर घायल या मरीज को अस्पताल तक ले जाने के लिए कोई 108 को फोन भी करता है तो अधिकांश कॉल लगना ही मुश्किल होता है।
कॉल लग भी जाए तो फिर उनकी नाम, पता, लोकेशन समेत अन्य कई जानकारी लेने की औपचारिकताओं में इतनी देर हो जाती हैं फोन करने का सब्र जवाब देने लगता हैं।
कुछ ऐसा ही मामला शुक्रवार सुबह सामने आया जहां एम्बुलेंस सेवा की यही लापरवाही की वजह से सड़क हादसे में घायल युवक एक घंटे से भी ज्यादा देर तक सड़क पर कराहता रहा।
राष्ट्रीय राजमार्ग 27 पर सरूपगंज थाना क्षेत्र के चेतना होटल के सामने हाईवे पर अज्ञात वाहन की टक्कर से एक राहगीर गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल युवक के दोनों पांव के ऊपर से वाहन गुजर गया था ऐसे में घायल युवक दर्द से कराह रहा था। घायल को अस्पताल भिजवाने के लिए मौजूद लोगों ने 108 एम्बुलेंस सेवा पर कॉल किया तो कॉल सेंटर के रिसीवर ने तमाम औपचारिकता पूरी करने के बाद प्रबंधक से बात करवाई और फिर स्थानीय ड्राइवर से करवाई।

ड्राइवर ने कहा 108 फिलहाल रोहिड़ा है। यहां है नहीं ऐसे में आप घायल को अन्य किसी वाहन में अस्पताल लेकर चले जाओ.. इसके बाद जैसे तैसे एम्बुलेंस भेजनें को सहमत हुए तो लोकेशन के लिए पूछने लगे की यह लोकेशन पिंडवाड़ा की तरफ है या आबूरोड की तरफ जबकि स्थानीय ड्राइवर रोजाना इस सड़क से दर्जनों बार गुजरते होंगे।
इतना सब होने के बाद भी 108 एम्बुलेंस मौक़े पर नहीं पहुंची आखिर उड़वारिया टोल प्लाजा की एनएच एम्बुलेंस को कॉल किया गया और मौजूद लोगों और एम्बुलेंस स्टाफ की मदद से घायल युवक को सरूपगंज के राजकीय सामुदायिक चिकित्सालय पहुंचाया गया।
लोग करते मदद तो नहीं भोगनी पड़ती असहनीय पीड़ा
शुक्रवार सुबह राजमार्ग पर दर्दनाक मंजर देखने को मिला, अज्ञात वाहन की टक्कर के बाद राहगीर दर्द से कराह रहा था। इस दौरान वहां से कई वाहन भी गुजरे, लेकिन सब अनदेखी कर निकल गए। इसके बाद होटल स्टाफ समेत अन्य लोग मौक़े पर पहुंचे और परिजनों को सूचना देने के साथ ही 108 पर लगातार प्रयास करते नजर आए।
क्या हैं नियम?
देशभर में सरकारी व्यवस्था के तहत सभी एम्बुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम निर्धारित हैं। राजस्थान में भी कॉल सेंटर पर फोन आने के बाद एम्बुलेंस के लोकेशन पर पहुंचने के लिए रिस्पॉन्ड टाइम निर्धारित कर रखा हैं। राज्य के शहरी क्षेत्र में 17 मिनट वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 15 मिनट के लगभग हैं। एम्बुलेंस को इस अवधि में तय लोकेशन पर हर हाल में पहुंचना होता हैं। रिस्पॉन्स टाईम मैनेज़ करने के लिए रिमोट लोकेशन के जरिये नजदीकी एम्बुलेंस को ही भेजा जाता हैं, लेकिन दूर्भाग्य हैं कि सिरोही जिले में अधिकतर मामलों में रिस्पॉन्स टाइम फेल साबित हो रहा हैं।
वहीं सिरोही सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी ने कहा- एम्बुलेंस सेवा का कोई भी अधिकारी-कर्मचारी मरीज को अस्पताल पहुंचाने में आनाकानी नहीं कर सकता। अगर ऐसी लापरवाही हुई हैं तो पूरे मामले की जांच कर लापरवाहों पर कार्रवाई की जाएगी।