तारीफों के तो पुल बांधते हो, तो फिर तस्वीर से गुरेज क्यों ??

तारीफों के तो पुल बांधते हो, तो फिर तस्वीर से गुरेज क्यों ??

तारीफों के तो पुल बांधते हो, तो फिर तस्वीर से गुरेज क्यों ??
तारीफों के तो पुल बांधते हो, तो फिर तस्वीर से गुरेज क्यों ??

first rajasthan @ जालोर. 31 अक्टूबर को देश के 2 महापुरुषों के तिथि है, एक की पुण्यतिथि और एक की जन्मतिथि। दोनों के कार्य इतने महान कि देश के युवाओं के लिए प्रेरणा से कम नहीं, लेकिन राजनीतिक पार्टियों ने इन्हें अपने अपने नजरिये से देखते हुए खण्डों में बांट दिया। यही दिन है जब नजारा कुछ अलग अलग ही नजर आता है। कांग्रेस की ओर से राजीव गांधी भवन में देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की 35 वीं पुण्यतिथि मनाई गई। वही इसी दिन देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्मदिन भी है। गांधी पुण्यतिथि के लिए कांग्रेस ने आयोजन किया और पटेल की जयंती मनाने के लिए भाजपा ने कार्यक्रम रखा।

जालोर में इंदिरा गांधी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित करते कांग्रेसी।

कांग्रेस ने राजीव गांधी भवन में इस दिन पुष्प अर्पित करने के लिए भले ही केवल इंदिरा गांधी की तस्वीर रखी हो, लेकिन वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ता सरदार पटेल की वाहवाही करने से भी नहीं चूके। यहां कई वक्ताओं ने संबोधित किया। वरिष्ठ कार्यकर्ता भंवरलाल चौपड़ा ने सम्बोधन में कहा कि हम जिनकी पुण्यतिथि मना रहे है, ठीक इसी दिन देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का भी जन्म हुआ था। महान व्यक्तित्व के धनी पटेल ने देश की आजादी के बाद 562 रियासतों का एकीकरण किया था। देश को एकता के सूत्र में पिरोया था, ठीक ऐसी एकता इंदिरा गांधी ने भी देश में बनाई। गांधी की पुण्यतिथि के साथ सरदार पटेल की जयंती होने के बावजूद कांग्रेस भवन में उनकी तस्वीर नहीं लगाई हुई थी। पुण्यतिथि पर आयोजित विचार गोष्ठी में कई वक्ताओं ने सम्बोधित किया। इस दौरान सवाराम पटेल, जितेंद्र कसाना, सोहनसिंह देवड़ा, देवाराम सांखला, योगेंद्रसिंह कुम्पावत,मिश्रीमल गहलोत, हुक्मीचंद माली, रमेश सोलंकी, रमेश मेगवाल, पुखराज, लक्ष्मणसिंह सांखला, धीरज गुर्जर समेत कई कांग्रेसी उपस्थित थे।

सरदार पटेल की जयंती मनाते भाजपाई।

कांग्रेस के गृहमंत्री की भाजपा मना रही जयंती
इधर, भाजपा कार्यालय में विधायक जोगेश्वर गर्ग की उपस्थिति में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाई। विधायक ने कहा कि पटेल ने देश की एकता में अमूल्य योगदान दिया। इस दौरान ओबाराम देवासी, अम्बालाल व्यास, सुरेश सोलंकी, दिनेश महावर समेत कई कार्यकर्ता मौजूद थे। आपको बता दे कि पटेल की जयंती पहले नहीं मनाई जाती थी। इसकी शुरुआत वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। उन्होंने इस दिन को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाना शुरू किया। उसके बाद सिलसिला शुरू हुआ।

कौन थे पटेल
देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 144 साल पहले 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नाडियाड में हुआ था। आजादी के बाद टुकड़ों में बिखरी 562 रियासतों को एकजुट करके उन्होंने ही एक भारत का निर्माण किया था। बता दें कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1948 में उपप्रधानमंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी थी।वहीं, 12 जनवरी 1948 को उन्होंने महात्मा गांधी को इस संबंध में पत्र भी लिखा था, लेकिन बापू से मंजूरी नहीं मिली। इस्तीफा देते समय उन्होंने कहा काम का बोझ इतना अधिक है कि उसे उठाते हुए मैं दबा जा रहा हूं मैं समझ चुका हूं कि अब और अधिक समय तक उठाने से देश का भला नहीं होगा बल्कि इसके विपरीत। देश का नुकसान होगा।