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Delhi Election: अब कौन बनेगा दिल्ली का सीएम? रेस में है ये 5 नाम

  • दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा शुरू हो गई है, लेकिन अंतिम निर्णय भाजपा का शीर्ष नेतृत्व करेगा।
  • प्रवेश वर्मा को मुख्यमंत्री पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है, हालांकि, दो अन्य ऐसे नाम भी चर्चा में हैं जो विधायक नहीं हैं।
Delhi CM Candidates, BJP Leadership in Delhi

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। पार्टी समर्थक संभावित नामों पर अनुमान लगाने में जुटे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय भाजपा का शीर्ष नेतृत्व करेगा। मुख्यमंत्री पद के लिए कई उम्मीदवारों के नाम चर्चा में हैं, लेकिन अब तक किसी ने अपनी दावेदारी खुलकर नहीं जताई है। इस महत्वपूर्ण निर्णय में थोड़ा समय लग सकता है। मौजूदा परिस्थितियों में प्रवेश वर्मा को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है, हालांकि दो अन्य नाम भी सामने आए हैं, जो विधायक नहीं हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने किसी सीएम उम्मीदवार का नाम पहले से घोषित नहीं किया था। यह चुनाव पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़ा गया, और जीत के बाद अब मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा का इंतजार हो रहा है। प्रवेश वर्मा, जिन्होंने पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को हराकर बड़ी सफलता हासिल की, इस दौड़ में सबसे आगे हैं। दो बार सांसद रह चुके प्रवेश ने नई दिल्ली सीट जीतने के बाद गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की है। दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में भाजपा की सफलता उनकी दावेदारी को और मजबूत करती है।

सांसदों और विधायकों के नाम चर्चा में

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री पद का चयन विधायकों में से ही किए जाने की संभावना है। यदि विधायक के बाहर से नाम चुना गया, तो सांसद मनोज तिवारी और बांसुरी स्वराज जैसे नाम भी इस सूची में शामिल हो सकते हैं। भाजपा दिल्ली के विकास और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री का चयन करेगी।

ये पांच नाम सीएम रेस में सबसे आगे

प्रवेश वर्मा: एक अनुभवी राजनेता हैं, जो दो बार सांसद रह चुके हैं। बाहरी दिल्ली से जुड़े होने के बावजूद, उन्होंने नई दिल्ली में अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया है। प्रवेश पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं और उनका पारिवारिक राजनीतिक आधार भी उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाता है।

विजेंद्र गुप्ता: भाजपा का एक प्रमुख वैश्य चेहरा हैं। वे दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और AAP की लहर के बावजूद पिछले दोनों विधानसभा चुनावों में अपनी जीत दर्ज कराई। 2015 में, जब भाजपा के पास केवल तीन विधायक थे, विजेंद्र उनमें से एक थे। उन्होंने 2020 में भी अपनी सीट बरकरार रखी। दो बार दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाते हुए उन्होंने दिल्ली की समस्याओं को गहराई से समझा और अपनी योग्यता साबित की।

सतीश उपाध्याय: भाजपा के ब्राह्मण चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, दिल्ली युवा मोर्चा के अध्यक्ष, और एनडीएमसी के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने संगठनात्मक और प्रशासनिक स्तर पर कई जिम्मेदारियां संभाली हैं। संघ में उनकी गहरी पकड़ और मध्य प्रदेश के सह प्रभारी के रूप में उनका अनुभव उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाता है।

आशीष सूद: भाजपा के पंजाबी समुदाय के प्रमुख नेता हैं। जनकपुरी से विधायक चुने गए सूद दिल्ली भाजपा के महासचिव रहे हैं और वर्तमान में गोवा के प्रभारी और जम्मू-कश्मीर के सह प्रभारी हैं। उनके केंद्रीय नेताओं के साथ करीबी रिश्ते हैं। डीयू छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में उनका अनुभव उनकी नेतृत्व क्षमता को और मजबूती देता है।

जितेंद्र महाजन: रोहतास नगर से लगातार तीन बार विधायक चुने गए हैं और वैश्य समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। आरएसएस के करीबी माने जाने वाले महाजन ने इस बार भी AAP की उम्मीदवार सरिता सिंह को बड़े अंतर से हराया। संगठन में उनकी पकड़ और लगातार जीत उन्हें डार्क हॉर्स के रूप में उभरने का अवसर देती है।

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