- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंदी और भारतीय भाषाओं के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
- उन्होंने कहा कि भाषा के नाम पर देश को तोड़ने का प्रयास बंद होना चाहिए।
- रानी वेलु नचियार के साहस और बलिदान को स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत बताया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा को खारिज करते हुए कहा कि हिंदी और भारतीय भाषाओं के बीच एक सहयोग का रिश्ता है। उन्होंने कहा, “हिंदी से सभी भारतीय भाषाएं मजबूत होती हैं और अन्य सभी भारतीय भाषाओं से हिंदी मजबूत होती है।”
राजनाथ सिंह ने उन लोगों को आड़े हाथों लिया जो भाषा के नाम पर देश में विभाजन पैदा करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “भाषा के नाम पर देश को तोड़ने का सिलसिला बंद होना चाहिए।”
रानी वेलु नचियार को राजनाथ सिंह ने दी श्रद्धांजलि
रक्षा मंत्री तमिलनाडु के रामनाथपुरम में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे, जो रानी वेलु नचियार को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित किया गया था। रानी वेलु नचियार रामनाथपुरम की शासक थीं और उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
राजनाथ सिंह ने कहा, “रानी वेलु नचियार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पहली महिला योद्धा थीं। उनका जीवन साहस और बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने यह साबित किया कि नेतृत्व का मतलब केवल सत्ता में होना नहीं है, बल्कि अन्याय और दमन के खिलाफ खड़ा होना है।”
महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से नए भारत का निर्माण
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में महिलाओं की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “इतिहास इस बात का गवाह है कि जब-जब महिलाओं की सार्वजनिक जीवन में भागीदारी बढ़ी है, तब-तब भारत का एक नया स्वरूप सामने आया है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने महिलाओं की क्षमताओं और प्रतिभाओं पर विश्वास जताया है। आज महिलाओं को उन क्षेत्रों में भी अवसर मिल रहे हैं, जो पहले उनके लिए बंद थे। सशस्त्र बलों की शायद ही कोई शाखा हो, जहां महिलाएं अपनी सेवाएं न दे रही हों।”
रक्षा मंत्री ने महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी सक्रिय भागीदारी के महत्व पर जोर दिया और इसे देश के विकास की कुंजी बताया।