- मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के चार दिन के बाद केंद्र सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया है।
- 13 फरवरी संसद के बजट सत्र के पहले चरण की कार्यवाही स्थगित होने के बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने की अधिसूचना जारी हुई।

नई दिल्ली: मणिपुर में जारी जातीय हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार ने गुरुवार को राष्ट्रपति शासन लागू करने का निर्णय लिया। यह फैसला मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के चार दिन बाद लिया गया। बीरेन सिंह ने 9 फरवरी को राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा था।
21 महीने से जारी हिंसा, 300 से ज्यादा मौतें
मणिपुर में 3 मई 2023 से कूकी और मैतेई समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है। अब तक इस संघर्ष में 300 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं। लगातार बिगड़ते हालात और विपक्षी दलों के बढ़ते दबाव के बीच बीरेन सिंह को पद छोड़ना पड़ा।
कूकी समुदाय की प्रतिक्रिया: ITLF ने उठाई अलग प्रशासन की मांग
कूकी समुदाय की संस्था ITLF (इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम) के प्रवक्ता गिन्जा वूलजोंग ने कहा कि बीरेन सिंह ने अविश्वास प्रस्ताव में हार के डर से इस्तीफा दिया है। हाल ही में उनका एक ऑडियो टेप लीक हुआ था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान में लिया। ITLF ने कहा कि वे अलग प्रशासन की अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर साधा निशाना
बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मणिपुर में हिंसा और जान-माल के नुकसान के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री को पद पर बनाए रखा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की जांच और कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव के दबाव के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
राहुल गांधी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी को तुरंत मणिपुर जाकर हालात का जायजा लेना चाहिए और बताना चाहिए कि सरकार राज्य में शांति बहाल करने के लिए क्या कदम उठा रही है।
बीरेन सिंह ने हिंसा पर मांगी थी माफी
दिसंबर 2024 में मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने राज्य में हिंसा और जानमाल की क्षति को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि पूरा साल बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहा और राज्य में जो कुछ भी हुआ, उसके लिए वे बेहद दुखी हैं।
उन्होंने बताया कि मई 2023 से अब तक मणिपुर में हिंसा से जुड़े 865 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं। हालांकि, हाल के हफ्तों में हिंसा की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई है और हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।
लीक ऑडियो से बढ़ी मुश्किलें
3 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा पर सुनवाई की थी। एक याचिका में मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के एक कथित लीक ऑडियो की जांच की मांग की गई थी, जिसमें वे मैतेई समुदाय को हिंसा भड़काने की अनुमति देने की बात कह रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब (CFSL) को 6 हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।