पत्रकार श्रवण जांगू का निधन : यह दुर्घटना में मौत नहीं यह हत्या है….

पत्रकार श्रवण जांगू का निधन : यह दुर्घटना में मौत नहीं यह हत्या है….

पत्रकार श्रवण जांगू का निधन : यह दुर्घटना में मौत नहीं यह हत्या है….
पत्रकार श्रवण जांगू का निधन : यह दुर्घटना में मौत नहीं यह हत्या है….

फर्स्ट राजस्थान @ जालोर
जालोर जिले के नेहड़ क्षेत्र में पिछले एक दशक से अधिक समय से कमजोर व पीड़ित वर्ग की आवाज बने हाड़ेचा के पत्रकार श्रवण जांगू (विश्नोई) का बुधवार को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि 11 दिसम्बर की रात को कथित दुर्घटना में घायल होने के बाद उन्हें जोधपुर अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, लेकिन सिर में गम्भीर चोट के कारण जिंदगी और मौत से जूझ रहे श्रवण का बुधवार को दम टूट गया। परिवार के लिए श्रवण ही एक रोजी रोटी का साधन था, इनके निधन से परिवार पर संकट आ चुका है। श्रवण जांगू ने अपनी पढ़ाई पर पूरी करने के बाद से ही पत्रकारिता में कदम रख दिया था। उन्होंने हाड़ेचा से दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका में करीब एक दशक से अधिक समय तक पत्रकारिता की। इस अवधि में उन्होंने वकालत की डिग्री भी प्राप्त कर ली थी, जोधपुर हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने का सपना था, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। कुदरत ने माता पिता के बुढ़ापे की लाठी और एक बेटे व बेटी से पिता छीन लिया।

स्थान की जांच जरूरी
आपको बता दे कि हाड़ेचा से कुछ ही दूरी पर स्थित इस दुर्घटना स्थल की जांच आवश्यक है। चूंकि प्राथमिक दृष्टया से कथित तौर पर मोटरसाइकिल स्लिप होकर दुर्घटना होना बताया जा रहा है। जिस स्थान पर दुर्घटना होना बताया जा रहा है उस स्थान को देखा जाए तो सड़क निर्माण में रखी गई खामी ही मूल दोष है। दरअसल सड़क का निर्माण ऐसा है कि अक्सर वहाँ दुर्घटना की आशंका रहती है। खासकर रात के वक्त तो सावधानी रखनी पड़ती है। आपको बता दें कि जहां हादसा हुआ वहां कि सड़क में बड़ी खामी है। सड़क का एक हिस्सा अधिक चौड़ा है और अचानक उसकी चौड़ाई कम कर दी गई, आगे मुरड़ (ग्रेवल) की पट्टी बनी हुई है। ऐसी स्थिति में रात के समय अक्सर बाइक स्लिप होकर गिरने की आशंका रहती है। कुछ ऐसी ही कथित तौर पर यही घटना बताई जा रही है। सड़क में रखी गई इस प्रकार की खामी सड़क निर्माणकर्ता की लापरवाही का नतीजा है। फिलहाल मामले सच्चाई सामने नहीं आई है, इसकी जांच के बाद ही पता चल पाएगा, लेकिन श्रवण जांगू के निधन से न केवल एक परिवार पर संकट आया है बल्कि उन तमाम लोगों की उम्मीद का तारा बुझ गया जो संकट के समय कलम के जरिये उनकी आवाज बनता था।

वीडियो : https://youtu.be/PvOospBPoXk