कोरोना के संकटकाल में जीवनदायिनी, श्रमिक बोल रहे हैं… जो जाएगा मनरेगा, वो भूख से कभी नहीं मरेगा

कोरोना के संकटकाल में जीवनदायिनी, श्रमिक बोल रहे हैं… जो जाएगा मनरेगा, वो भूख से कभी नहीं मरेगा

लेटेस्ट 9 मई के दिन जालोर जिले में 4249 कार्यों 79541 श्रमिकों ने मनरेगा के तहत कार्य किया

दिलीप डूडी/फर्स्ट राजस्थान @ जालोर
वैश्विक महामारी कोरोना काल के इस संकट में ग्रामीण इलाकों में मनरेगा लोगों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। पिछले कई वर्षों बाद इन दिनों बड़ी संख्या में न केवल मनरेगा कार्य संचालित हो रहे है, बल्कि बड़ी संख्या में श्रमिक भी कार्य कर रहे है। जब से मनरेगा ऑनलाइन हुई है, उसके बाद से इतनी संख्या में मनरेगा के लिए श्रमिक नहीं मिल पाए थे, लेकिन अभी कोरोना बीमारी के साथ रोजगार के संकट के कारण जालोर जिलेभर में मनरेगा श्रमिकों की संख्या प्रतिदिन करीब अस्सी हजार के पास पहुंच रही है, इतनी संख्या में पिछले कई सालों में श्रमिक नहीं आ पा रहे थे, श्रमिकों के अभाव के कारण पिछले पांच साल से तो मनरेगा एक बारगी कागजों में मृत अवस्था में पहुंच गई थी। अधिकारी भी निढाल होने की स्थिति में आ गए थे, लेकिन मनरेगा जिन उद्देश्य के लिए तैयार की गई है, उसकी वास्तविकता अब लोगों को समझ आने लगी है। इस संकट काल में मनरेगा ग्रामीणों के लिए मुख्य रोजगार का साधन बनी हुई है।
यह है जालोर जिले की स्थिति
जिले के सभी आठ ब्लॉक में मनरेगा कार्य शुरू है। 307 में से 273 पंचायतों में काम चालू है। इनमें 33 नई पंचायतें भी शामिल है। जिले में कुल 11 हजार 47 मस्टररोल है, जिनमें से अभी 4249 मस्टररोल जारी है। इन पर 79 हजार 541 श्रमिक काम कर रहे है। इस बार हर पंचायत में 200 से अधिक श्रमिक काम कर रहे है। केवल 38 ग्राम पंचायतें ही ऐसी है, जहां 200 से कम श्रमिक है।
आहोर ब्लॉक के सभी गांवों में मनरेगा कार्य चालू

जालोर जिले के सभी आठ ब्लॉक में से आहोर ब्लॉक ऐसा है, जिसके सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्य शुरू है। आहोर के सभी 41 ग्राम पंचायतों में 406 मस्टररोल जारी किए हुए है, पूरे ब्लॉक में सर्वाधिक 12 हजार 895 श्रमिक कार्य पर लगे हुए है। जबकि सबसे कम रानीवाड़ा क्षेत्र में है, रानीवाड़ा की 37 में से 33 पंचायतों में 510 मस्टररोल जारी है, जिन पर सबसे कम 7 हजार 561 मजदूर कार्य करते है।
सांचौर ब्लॉक में सर्वाधिक कार्य जारी
जिले के सांचौर ब्लॉक में सर्वाधिक स्थानों पर कार्य शुरू है। सांचौर ब्लॉक के 36 ग्राम पंचायतों में 933 मस्टररोल जारी किए हुए है, जिन पर 8 हजार 763 श्रमिक कार्य पर लगे हुए हैं।
जीवनदायिनी बन रही मनरेगा, श्रमिकों की संख्या बढ़ने की संभावना
रोजगार गारंटी योजना के उद्देश्य से शुरू मनरेगा शुरुआती दिनों में तो अच्छी चल रही थी, ऑफलाइन कामकाज के दौरान काफी संख्या में श्रमिक काम पर आते थे, लेकिन बाद में राजनीतिकरण की भेंट चढ़ने के कारण मनरेगा का नाम मात्र की औपचारिकता के लिए रह गई। कागजी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद श्रमिक भी नहीं आते थे, अन्य स्थानों पर रोजगार मिलने से मनरेगा का लाभ लेने वालों की संख्या बहुत कम रह गई थी, लेकिन अब जैसे ही कोरोना महामारी फैली तो लॉक डाउन में घरों में बैठे लोगों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों के लिए मनरेगा जीवनदायिनी साबित होने लगी है। अधिकारियों की माने तो आगामी दिनों में मनरेगा श्रमिकों की संख्या में इजाफा होने की सम्भावना है। अधिकारियों के मुताबिक मनरेगा के तहत कार्य उपलब्ध है, कोई श्रमिक इसका लाभ ले सकता है। समय सुबह छह से 1 बजे तक का होने के कारण किसी को दिक्कत भी नहीं होगी।