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फ्रांस में राजनीति: एक चरम खेल

राजनीति और राजनीति से जुड़ी विचारधाराओं में परिवर्तन कोई नई बात नहीं है, लेकिन आज के समय में यह परिवर्तन कहीं अधिक स्पष्ट और जटिल हो गया है। “चरमपंथ” शब्द का अर्थ भी इसी जटिलता का शिकार हो चुका है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को हाल ही में “चरम केंद्रपंथी” के रूप में परिभाषित किया गया है, जो इस बहस को और अधिक रोचक बना देता है।

“चरम केंद्र” का क्या मतलब है?

फ्रांसीसी अख़बार ले मोंड ने हाल ही में एक लेख में “चरम केंद्र” शब्द का विश्लेषण किया। यह शब्द उन व्यक्तियों, समूहों या पार्टियों के लिए उपयोग किया जाता है जो खुद को राजनीतिक स्पेक्ट्रम के केंद्र में मानते हैं, लेकिन जिनकी नीतियां और दृष्टिकोण अक्सर अत्यधिक सत्तावादी हो जाते हैं।

इतिहासकार पियरे सेरना के अनुसार, चरम केंद्र उन विचारों का समर्थन करता है जो वर्तमान व्यवस्था को बनाए रखने के प्रति कट्टर होते हैं और किसी भी प्रकार के विरोध को अस्वीकार करते हैं। यह न केवल लोकतंत्र के लिए खतरनाक है, बल्कि यह सामाजिक असमानता को भी बढ़ावा देता है।

मैक्रों और उनका “जुपिटरियन” दृष्टिकोण

इमैनुएल मैक्रों ने 2022 के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर के बाद खुद को “चरम केंद्रपंथी” कहा था। हालांकि, उन्होंने यह नहीं समझा कि इस शब्द का मतलब उनके नेतृत्व शैली और नीतियों को सटीक रूप से परिभाषित करता है।

मैक्रों का “जुपिटरियन” दृष्टिकोण उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत करता है जो बाजार की ताकतों को सर्वोपरि मानता है और जनता के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने में असमर्थ रहता है। उनका ध्यान केवल वित्तीय सुधारों और बाजार केंद्रित नीतियों पर केंद्रित रहा है, जो मध्यम वर्ग और गरीब तबके के लिए हानिकारक साबित हुई हैं।

चरम केंद्र बनाम अन्य विचारधाराएं

फ्रांस की बहुदलीय प्रणाली में “चरम केंद्र” की अवधारणा ने कई विरोधाभास उत्पन्न किए हैं। चार-पांच दशक पहले जो लोग कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थक थे, वे अब चरम दक्षिणपंथ का समर्थन कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि विचारधाराओं के बीच की रेखाएं कितनी धुंधली हो चुकी हैं।

फ्रांस में चरम केंद्रपंथ के प्रभाव का एक प्रमुख उदाहरण है सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर सरकार की नीतियां। द जैकोबिन को दिए गए एक साक्षात्कार में फ्रांसीसी सांसद डेनियल ओबोनो ने कहा कि मैक्रोनिज्म “सामाजिक और पर्यावरणीय विरोध के प्रति कट्टर” है।

क्या भविष्य में बदलाव संभव है?

इमैनुएल मैक्रों के नेतृत्व की आलोचना के बावजूद, उनके पास 2027 तक का समय है। लेकिन उनकी असफल नीतियां और गठबंधन की कमजोरी 2027 से पहले ही उनके पतन का कारण बन सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी मरीन ले पेन हैं, जो चरम दक्षिणपंथ की प्रतिनिधि हैं।

फ्रांस की राजनीति में “चरम केंद्र” की अवधारणा ने यह साबित कर दिया है कि जब लोकतंत्र का केंद्र चरमपंथी हो जाता है, तो यह न केवल विरोध को दबाता है बल्कि जनता के लिए न्याय और समानता की संभावनाओं को भी समाप्त करता है। इमैनुएल मैक्रों का “चरम केंद्रपंथ” यह दर्शाता है कि राजनीति में स्थिरता बनाए रखने का दावा, असल में, समाज को स्थिरता से दूर कर सकता है।

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