- पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि 36 घंटे के ऑपरेशन के बाद सभी बंधकों को छुड़ा लिया गया और 33 चरमपंथियों को मार गिराया गया।
- बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने सेना के दावों को झूठा करार दिया और कहा कि बंधक अभी भी उनके कब्जे में हैं।
- बीएलए के प्रवक्ता ने सेना पर अपने जवानों को छोड़ने और झूठे बयान देने का आरोप लगाया।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हुई ट्रेन हाईजैक की घटना ने नया मोड़ ले लिया है। पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि उसने 36 घंटे के ऑपरेशन के बाद बंधकों को छुड़ा लिया और सभी आतंकवादियों को मार गिराया। हालांकि, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इन दावों को झूठा करार दिया और कहा कि झड़प अभी भी जारी है।
सेना का दावा: ऑपरेशन सफल रहा
पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग आईएसपीआर ने बुधवार देर रात बयान जारी कर कहा कि ऑपरेशन के दौरान 33 चरमपंथियों, जिनमें उनके नेता भी शामिल थे, को मार गिराया गया। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं और बच्चों समेत सभी बंधकों को सुरक्षित बचा लिया गया। हालांकि, सेना ने न तो कोई तस्वीर जारी की और न ही वीडियो, जिससे उनके दावे पर सवाल उठने लगे।
BLA ने किया पलटवार
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता जीयांद बलूच ने पाकिस्तानी सेना के बयान को झूठ बताया। उनका कहना है कि ट्रेन अभी भी उनके नियंत्रण में है और बंधकों में अधिकतर पाकिस्तानी सैनिक शामिल हैं। उन्होंने सेना पर अपने जवानों को मरने के लिए छोड़ने का आरोप लगाया।
मशकफ में जारी है संघर्ष
बीएलए ने अपने मीडिया चैनल हक्काल पर एक ऑडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने बताया कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को रिहा कर दिया गया है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, मशकफ के पास भीषण लड़ाई जारी है। पहाड़ों से विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं और सैन्य हेलीकॉप्टर हवाई निगरानी कर रहे हैं।
सेना की चुप्पी पर उठे सवाल
पाकिस्तानी सेना की ओर से ऑपरेशन की सफलता के बड़े दावे किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत अलग नजर आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेना की ओर से कोई ठोस सबूत न देना उनके दावों पर सवाल खड़े करता है।
पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा
बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा और पाकिस्तानी सेना की नाकामी पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर है। बीएलए के लगातार हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर दिखाया है।
यह घटना न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को सवालों के घेरे में लाती है, बल्कि बलूचिस्तान में बढ़ते विद्रोह को भी उजागर करती है।