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कैंसर से जूझती रही, अंतिम सांसों तक मुस्कुराती रही – प्रियंका कुंवर ‘पीहू’ की जिंदादिली हमेशा रहेगी याद

जालोर। जिंदगी और मौत की जंग में कभी-कभी इंसान हार तो जाता है, लेकिन उसकी जिंदादिली हमेशा अमर हो जाती है। जालोर जिले की बेटी प्रियंका कुंवर उर्फ़ पीहू ने कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से जूझते हुए भी अपने चेहरे की मुस्कान और हौसले को कभी नहीं खोया। महज 27 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन आखिरी सांस तक उनकी जिंदादिली की कहानी हर किसी की आंखें नम कर गई।


अस्पताल में आखिरी इच्छा – केक काटकर मनाया जश्न

उदयपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान जब डॉक्टरों ने परिवार को स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया, तब पीहू ने अपने परिजनों से आखिरी बार एक इच्छा जताई—”मैं केक काटना चाहती हूं।”

परिवार ने उनकी इस इच्छा को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ICU वार्ड को सजाया गया, केक मंगाया गया और माहौल को बच्चों की तरह खुशनुमा बनाने की कोशिश की गई। पीहू ने मुस्कुराते हुए केक काटा और यह पल हर किसी के दिल में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।


प्रियंका उर्फ़ पीहू – शिक्षा और करियर में भी मिसाल

  • जन्म: 17 फरवरी 1998, पचानवा गांव (जालोर)।
  • शिक्षा: प्रारंभिक पढ़ाई कर्नाटक के हुबली से, बीबीए ग्रेजुएशन वहीं से।
  • प्रोफेशनल सफलता: चार्टर्ड अकाउंटेंसी (सीए) परीक्षा उत्तीर्ण की।
  • विवाह: 26 जनवरी 2023 को लक्षयराज सिंह भाटवास से हुआ।

परिवारजनों के अनुसार, पीहू बचपन से ही तेज-तर्रार, जिम्मेदार और होशियार थीं। परिवार के लिए हमेशा संबल बनी रहीं।

दर्द की शुरुआत और लंबी इलाज की प्रक्रिया

शादी के कुछ समय बाद ही पीहू को पैरों में दर्द की समस्या हुई। शुरुआत में इसे सामान्य माना गया, लेकिन दर्द बढ़ता गया। फिजियोथेरेपी और दवाइयों से भी आराम नहीं मिला तो जांच में स्पाइन (रीढ़ की हड्डी) में गांठ पाई गई।

मार्च 2023 में पहली सर्जरी हुई और जांच में Ewing Sarcoma (Ewing Cancer) की पुष्टि हुई। इसके बाद—

  • मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में एक साल तक रेडिएशन और कीमोथेरेपी।
  • अपोलो हॉस्पिटल में ब्रेन रेडिएशन।
  • स्पाइन में तीन बड़े ऑपरेशन।

इन तमाम कोशिशों के बावजूद कैंसर को हराया नहीं जा सका।


हर पल मुस्कुराती रही पीहू

डॉक्टरों, परिजनों और अस्पताल स्टाफ का कहना है कि इतनी गंभीर बीमारी के बावजूद पीहू के चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती थी। उन्होंने अपने साहस से सभी को प्रेरित किया। यही कारण रहा कि उनके निधन पर अस्पताल का हर शख्स, डॉक्टर से लेकर नर्स तक, भावुक होकर रो पड़ा।


अमर हो गई जिंदादिली

प्रियंका कुंवर उर्फ़ पीहू का जीवन भले ही छोटा रहा, लेकिन उनकी जिंदादिली ने एक अमर कहानी लिख दी। एक ऐसी कहानी जो हमें यह सिखाती है कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, जिंदगी को मुस्कुराते हुए जीना ही असली साहस है।

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