रेतीले बाड़मेर की बेटी दिव्या का RJS में चयन, NLU से गोल्ड मेडल से लॉ की और बिना कोचिंग किए की सफलता हासिल

रेतीले बाड़मेर की बेटी दिव्या का RJS में चयन, NLU से गोल्ड मेडल से लॉ की और बिना कोचिंग किए की सफलता हासिल

रेतीले बाड़मेर की बेटी दिव्या का RJS में चयन, NLU से गोल्ड मेडल से लॉ की और बिना कोचिंग किए की सफलता हासिल
रेतीले बाड़मेर की बेटी दिव्या का RJS में चयन, NLU से गोल्ड मेडल से लॉ की और बिना कोचिंग किए की सफलता हासिल

माधुसिंह गोरा @ बाड़मेर
इंसान अगर चाहे तो अपने मकसद में कामयाब हो ही जाता है, मंजिलें कितनी ही दूर हो आसान बनाना इंसान के हाथ में ही होता है। यह कहना है दिव्या गोदारा का, जिनका बुधवार को आए राजस्थान न्यायिक सेवा परिणाम में इनका चयन हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र से निकली दिव्या के आरजेएस बनने से न केवल उनके परिजन बल्कि गांव व जिले में व इनके गुरुजनों में भी खुशी का माहौल है।

दिव्या पूर्व सरपंच एंव समाज सुधारक स्व भूराराम गोदारा की पौत्री व कांग्रेसी नेता दौलतराम गोदारा की पुत्री है । उन्होंने अपने दादा जी सपना साकार करते हुए जिले व समाज का नाम रोशन कर दिया। दिव्या ने 2017 में NLU पटियाला से लॉ की वो भी गोल्ड मेडल से सफलता हासिल की, दिव्या ने बिना कोचिंग किए द्वितीय प्रयास में ही यह सफलता हासिल की। दिव्या ने ओबीसी प्रथम व जनरल में 17 वी रेंक हासिल की है। बता दे शुरुआत से ही दिव्या मेधावी छात्रा रही है इनके 10वीं व 12वीं में 86% से ऊपर प्रतिशत से पास की है।

बता दें, आरजेएस 2018 का रिजल्ट मंगलवार रात को घोषित हुआ था। जिसमे बाड़मेर के कुम्पलिया निवासी दिव्या ने ओबीसी वर्ग में टॉप किया है। दिव्या ने बालोतरा से अपनी प्राथमिक से सीनियर की शिक्षा प्राप्त की। चयन हो जाने की सूचना मिलते ही परिवारजनों में खुशी का माहौल हो गया, जिसमें एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां मनाई। दिव्या ने ईमानदारी से लोगों को न्याय देने का किया वादा किया है।

उल्लेखनीय है कि इसमें कुल 499 अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार दिया था, जिसमें से 197 अभ्यर्थी सफल होकर न्यायिक मजिस्ट्रेट बने हैं। दिव्या गोदारा पिता दौलत राम गोदारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के मिशन को लेकर चल रहे है। वहीं दिव्या गोदारा के दादा जी भूराराम चौधरी किसान हित के सजग प्रहरी रहे हैं।
दिव्या की इस सफलता के बाद उनके पिता दौलत राम गोदारा बताते है कि दिव्या की न्यायिक क्षेत्र में यह उत्कृष्ट उपलब्धियां जन-जन को प्रेरित करते हुए समाज व राष्ट्र की सेवा में उल्लेखनीय योगदान देने वाली है।

दिखाई नई राह

सिविल जज बनने के बाद अब दिव्या का एक ही लक्ष्‍य है कि न्याय की कुर्सी पर बैठकर वह लोगों को न्‍याय दे सकें। दिव्या की इस सफलता के चर्चे पूरे गांव में हो रहें है। गांव वालों का कहना है कि अपने दादा जी गांव ने न्याय की पंचायती किया करते थे उनका एक ही सपना था कि मेरा परिवार भी लोगो का न्याय करे, अब दिव्या ने इस गांव का मान बढ़ाने के साथ ही यहां के युवाओं को एक नई राह दिखाई है। दिव्या के आरजेएस में चयन होने पर राजस्व मंत्री व बायतू विधायक हरीश चौधरी ने उन्हें बधाई दी !

इसी तरह जोधपुर निवासी शालिनी चौधरी पिता श्री प्रदीप ग्वाला का भी राजस्थान न्यायिक सर्विस (RJS) में चयन हुआ है। शालिनी मूलतः गांव असावरी नागौर से है । इन्होंने इससे पूर्व LLB, LLM, NEF क्वालीफाई के बाद अब यह उपलब्धि हासिल की है। अभी वे पीएसडी कर रहे है। इस उपलब्धि पर उनके चाचा रामनिवास ग्वाला बताते है कि यह हमारे जोधपुर व नागौर का गौरव बढ़ाया। साथ ही बताया कि किसान वर्ग की बेटियाँ आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं यह आने वाली पीढ़ी के लिए शुभ संकेत हैं।