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रक्तदान शिविरः फेल हुए भाजपा नेता, जिम्मेदारी अधिकारियों की

  • कम संख्या पर कलेक्टर और सीएमएचओ पर नाराज हुए मंत्री
  • सिरोही सफल करवा नहीं पाए आबूरोड का श्रेय की कोशिश

सिरोही। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर मंत्री, सांसद और जिलाध्यक्ष के रहते हुए भाजपा अपनी पार्टी के सिर्फ 13 लोगों को रक्तदान के लिए प्रोत्साहित कर पाई। देश के सबसे विफल कार्यक्रमों में से एक कार्यक्रम ये रहा होगा। इसकी धमक दिशा बैठक में भी सुनाई दी। राजस्थान सरकार के पंचायतराज मंत्री और सांसद इसे लेकर जिला कलेक्टर और सीएमएचओ पर खफा होते नजर आए। रक्तदान स्वैच्छिक कार्यक्रम है। इसके लिए अपने कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने की जो जिम्मेदारी मंत्री, सांसद और जिलाध्यक्ष की थी उसके लिए जिले के अधिकारी कैसे दोषी हो गए भला। संगठन में अपने फेलियर को छिपाने के लिए दिशा बैठक में उठा ये मुद्दा हास्यास्पद ज्यादा लग रहा है।

जब सरकार पर विश्वास नही तो नेताओ पर कैसे होगा


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर शुरू हुए सेवा पखवाडे के पहले दिन जिला मुख्यालय पर होने वाले रक्तदान शिविर कार्यकर्ता क्यों नहीं उमडे से बात मंत्री और सांसद को इसी बैठक में उडवारिया सरपंच और भाजपा के जिला कार्यालय सहमंत्री जेताराम चैधरी के जवाब से समझ जाना चाहिए। कांग्रेस ही नहीं खुद भाजपा में ये विश्वास है कि प्रदेश की भजनलाल सरकार कठपुतली सरकार है जिसका नियंत्रण जयपुर नहीं दिल्ली से है।

इसी सरकार के अधिकारी भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को धार नहीं रहे हैं और जनहित के कामों को लटका रहे हैं। जब भाजपा से जुडा एक जनप्र्रतिनिधि ये कह दे कि उसे सरकार पर विश्वास नहीं है तो फिर इस बात को स्पष्ट कहने की जरूरत ही नहीं है कि आखिर प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर कार्यकर्ता रक्तदान के लिए सिरोही में क्यों नहीं उमडे।

श्रेय ओढने की कोशिश


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर सिरोही जिले में दो जगह रक्तदान हुआ था। एक आबूरोड में दूसरा सिरोही में। सिरोही में मंत्री, सांसद और जिलाध्यक्ष अपने कार्यकर्ताओं में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आस्था जगाने में पूरी तरह से नाकाम रहे और ये कार्यक्रम फेल हो गया। वहीं आबूरोड का कार्यक्रम भी संख्यात्मक रूप से थोडा सम्मानजनक रहा लेकिन, भाजपा के जनप्रतिनिधियों के लिए अपने कार्यक्रमों के आगे फीका रहा।

दिशा की बैठक में मंत्री ओटाराम देवासी, सांसद लुम्बाराम चैधरी और पिण्डवाडा के प्रधान नितिन बंसल इसकी सफलता का श्रेय खुद ओढते हुए दिखे। ओटाराम देवासी और सांसद ने इसके लिए दो दिन पहले उनके द्वारा किए गए प्रयासों को श्रेय दिया वहीं नितिन बंसल ने तो एक बस भरकर रक्तदाताओं को वहां भेजने का दावा किया।


-घर का जोगी जोगना, आन गांव का संत


घर का जोगी जोगना आन गांव का संत। दिशा बैठक में मंत्री और सांसद के आबूरोड के कार्यक्रम की सफलता का श्रेय ओढने पर ये कहावत एकदम सटीक बैठती है। जब इन नेताओं की बातों का कार्यकर्ताओं पर इतना प्रभाव था तो ये अपने ही गृह और प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में भी यही करवा सकते थे।

आखिर दुनिया की सबसे बडी पार्टी के सिरोही जिला संगठन में कार्यकर्ताओं की कमी थोडी रही होगा। ये तीनों जिला संगठन के सिर्फ तीन और नौ मंडलों के 565 पदाधिकारियों में से सिर्फ 2 का ही रक्तदान करवाने के लिए प्रेरित करवा पाए वो आबूरोड का सारा श्रेय वहां के कार्यकर्ताओं को देने की बजाय खुद ओढने को आतुर हैं।


-वहां भी टारगेट 250 का


आबूरोड में जो टारगेट साधा गया था उसका आधा भी यहां पर पूरा नहीं कर पाए। रक्तदाताओं को दिए गए काॅफी कप पर प्रधानमंत्री और जिलाध्यक्ष की छपी तस्वीर बता रही है कि ये भी जिला स्तरीय कार्यक्रम था, जिसके लिए आठ मंडल लगे थे। मूल मंडल और मोर्चों की कार्यकारिणी के एक हजार पदाधिकारी होते हैं इसमें से 102 की संख्या मात्र दस प्रतिशत है। जबकि यहां पर रक्तदाताओ ंको दिए गए काॅफी कपों की संख्या बता रही है कि यहां का टारगेट 250 का था। ये भी स्थानीय कार्यकर्ताओं की मेहनत से पूरा हो पाया न कि मंत्री, सांसद और जिलाध्यक्ष के प्रति समर्पण से।

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