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विधायक ने जताई माउण्ट आबू में टोकन व्यवस्था से भ्रष्टाचार पनपने की आशंका!

पिण्डवाडा-आबू विधायक समाराम गरासिया ने लगाया आरोप
यूआईटी भंग करने और माउण्ट आबू का नाम आबूराज करने की मांग

आबूरोड में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाउ बेगडे से मुलाकात करते पिण्डवाडा आबू विधायक समाराम गरासिया।

आबूरोड। माउंट आबू की नगर पालिका में बिल्डिंग मटेरियल के टोकन कोई लेकर भारी भ्रष्टाचार पनपने की आशंका कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि उस विधानसभा के सत्ताधारी दल भाजपा के विधायक लगा रहे हैं। पिंडवाड़ा-आबू के विधायक समाराम गरासिया ने राज्यपाल हरिभाऊ बेगडे के आबूरोड प्रवास के दौरान दिया गए ज्ञापन में लगाते हुए माउण्ट आबू में बिल्डिंग मटेरियल जारी किए जाने की व्यवस्था को बंद करवाने की मांग की है।


विधायक ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि नगर पालिका से टोकन जारी करने की व्ययस्था हैं। जिसमे कार्यालय द्वारा सिमित मात्रा में निर्माण सामग्री लाने की स्वीकृति प्रदान की जाती हैं। जिस के लिए स्थानीय निवासियों को कई प्रकार की कागजी कार्यवाही से गुजरना पड़ता हैं। इस कार्यवाही के कारण कार्यालयों में भ्रष्टाचार पनपता हैं। और कई बार सामग्री खत्म होने के कारण लोगो को कम सामग्री में कार्य करवाना पड़ता हैं या फिर कार्य बिच में बंद करवाना पड़ता हैं।
महामहिम आबू पर्वत में कई ऐसे प्राचीन रिहायशी घर है जो जर्जर अवस्था में हैं जिनको पुर्निर्माण करवाना अतिआवश्यक हैं लेकिन गरीब व अनपढ़ इस नियम में उलझ जाते हैं और निर्माण नहीं करवा पाते। उन्होंने आबू पर्वत में निर्माण कार्य के लिए टोकन व्यवस्था को बंद कर अन्य नगर पालिकाओं के जैसे सीधे भवन निर्माण की स्वीकृति की व्यवस्था को शुरू करवाने की मांग की है। गरासिया के द्वारा दिए गए अलग-अलग ज्ञापनों में से एक में माउण्ट आबू का नाम आबूराज करने की भी मांग राज्यपाल से की गई।

यूआईटी क्षेत्र में भू-माफिया सक्रिय होने का आरोप


विधायक गरासिया ने एक अन्य ज्ञापन में बताया कि कांग्रेस सरकार द्वारा 2009 में जनजाति बाहुल्य क्षेत्र आबू में नगर सुधार न्यास आबू का गठन किया गया। जिसके अंतर्गत शामिल हुई सभी ग्राम पंचायत जनजाति क्षेत्र की थी। इसके गठन के उपरांत यंहा निवासरत जनजाति वर्ग के लोगो के अधिकार छीन गए व यंहा का विकास रुक गया। न्यास की जटिल प्रक्रिया का पालन करना जनजाति वर्ग के लोगो के लिए संभव नहीं था क्यूंकि जानकारी व कार्मिको कमी के कारण लोगो को रोज कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते है।

जिस कारण यंहा भूमाफिया सक्रीय हो गए। उनके द्वारा भूमियो का आवंटन व नई कालोनियां विकसित कर ऊँचे दामो में बेची गई। न्यास के गठन के बाद में आज तक स्थानीय जनजाति वर्ग के लोगो व इसमें शामिल ग्राम पंचायतो में किसी भी प्रकार का विकास कार्य या सुविधायो का विस्तार नहीं कराया गया। जिस कारण यंहा के स्थानीय लोग लम्बे समय से नगर सुधार न्यास का विरोध कर रहे है। गरासिया ने यूआईटी को भंग करने की भी मांग की।

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