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क्या है लाॅटरी एक्ट की धारा 2 बी जिसका माउण्ट आबू में हो रहा है उल्लंघन

  • लाॅटरी रेगुलेशन एक्ट 1998 की धारा दो में लाॅटरी परिभाषित
  • धृतराष्ट्र की भूमिका निभा रही है पुलिस और प्रशासन
माउण्ट आबू में रामलीला समिति के द्वारा निकाले गए ईनामी टिकिट

माउंट आबू । भारत सरकार लोगों को तबाही से बचाने के लिए 1998 में लेकर आई थी लाॅटरी एक्ट। इसके तहत सभी राज्यों को अपने यहां पर लाॅटरी की गतिविधियों पर रोक लगानी थी। इसकी धारा दो बी में जो परिभाषा लाॅटरी की दी गई है उसका माउण्ट आबू चल रही रामलीला समिति के कार्यक्रम में उल्लंघन हो रहा है। लेकिन, इस समिति के कई राजनीतिक दलों के नेताओं के भी जुडे होने से पुलिस और प्रशासन इस बर्बादी को यहां पर पैर पसारने दे रही है।
लाॅटरी रेगुलेशन एक्ट 1998 की धारा दो में लाॅटरी को परिभाषित किया गया है। इसी की उपधारा दो में लिखा है कि टिकिट खरीदने के बदले किसी व्यक्ति को ईनाम मिलने के चांस का दावा करना भी लाॅटरी की परिभाषा में आता है। माउण्ट आबू में सब्जी मंडी चैराहे पर करवाई जा रही रामलीला से दौरान रामलीला समिति के द्वारा यही किया जा रहा है। यहां पर अलग से टेबल लगाकर टिकिट बेचे जा रहे हैं। इन्हें ईनामी कूपन नाम दिया गया है। यहां पर सौ रुपये का ईनामी कूपन बेचा रहा है। इसके बदले में मोटर साइकिल, फ्रीज, टीवी आदि जैसे ईनाम मिलने का दावा किया जा रहा है।

नियंत्रित करना राज्य सरकार का काम


लाॅटरी रेगुलेशन एक्ट केन्द्र सरकार ने बनाया है। इसको लागू करने की बाध्यता केन्द्र ने राज्य सरकार को दी है। राज्य को पुलिस और प्रशासन के माध्यम से इसे लागू करवाना है। लेकिन, माउण्ट आबू में अलग ही किस्म की अंधेरगदी है। यहां पर प्रशासन और पुलिस दोनों ही रामलीला में धृतराष्ट्र की भूमिका निभा रही है। अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर इस कानून का उल्लेंघन करके लाॅटरी को प्रेरित कर रही है।इसकी धारा 5 के तहत राज्य को अपने यहां पर अपने राज्य के अलावा दूसरे राज्यों की लाॅटरी के टिकिट की बिक्री को भी प्रतिबंधित करने को अधिकृत किया गया है। लेकिन, माउण्ट आबू में समरथ को नहीं दोस गोसाई वाला हाल हो रखा है।

संज्ञेय और नाॅन बेलेबल


लाॅटरी रेगुलेशन एक्ट के तहत किसी भी तरह की लाॅटरी का संचालन संज्ञेय और नाॅन बेेलेबल है। इस तरह के कृत्य के लिए सजा का भी प्रावधान रखा गया है। इस अधिनियम के तहत राज्य सरकार के द्वारा नियुक्त एजेंसियां टिकिट के माध्यम से लाॅटरी चलाने वाली संस्थान या व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कर सकती हैं। यदि ये सिद्ध हो जाता है कि ये काम जानबूझकर किया गया है तो ऐसे लोगों को दो साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान या दोनों का प्रावधान है।

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