
नदी पर पुलिया नहीं होने से आदिवासी गांवो का टूटा संपर्क
मौजूदा सरकार ने अपने दूसरे बजट में नदी पर पुल बनाने की की हैं घोषणा
पुल बनेगा तो बारिश के मौसम में इस समस्या से मिलेगी निजात
- गौरव मित्तल की एक्सक्लुसिव रिपोर्ट
सिरोही। शासन और प्रशासन भले ही विकास के बड़े बड़े दावे करते हो लेकिन यह दावे शहरी क्षेत्रों तक ही सिमित नजर आते हैं क्यूंकि ग्रामीण क्षेत्रों के गांवो की बात करें तो यहां के लोगों की हालात बद से बदतर हो गए हैं। आजादी के सात दशक बीत जाने के बावजूद भी ग्रामीण यहां मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
सिरोही जिले के पिंडवाड़ा उपखंड के रोहिड़ा गांव में आज भी शासन-प्रशासन द्वारा ग्रामीणों के आवागमन के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। बारिश के मौसम में तेज बारिश के चलते दर्जनों गांवो का शहर व गांवो से संपर्क टूट जाता हैं।गौरतलब हैं कि पिछले दो-तीन दिनों से सिरोही जिले में हो रही तेज बारिश के चलते जिलेभर के सभी नदी-नाले उफान पर हैं और जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हैं।रोहिड़ा की सुकड़ी नदी पर पुलिया निर्माण के लिए सरपंचो समेत स्थानीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने कई बार शासन व प्रशासन से मांग की लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया हैं।
बरसात के मौसम में बच्चों का छूट जाता हैं स्कूल-
रोहिड़ा की सुकड़ी नदी पर पुल नहीं होने की वजह से हर साल बारिश के मौसम में तीन से चार महीने तक आसपास के दर्जनों गांव के लोगों को काफी दिक्क़तों का सामना करना पड़ता हैं। पुल हो होने की वजह से गांवो का सम्पर्क टूट जाता हैं।रोहिड़ा गांव में हाई स्कूल और माध्यमिक विद्यालय हैं।आसपास के गांवो के बच्चों ने पढ़ाई के लिए प्रवेश ले रखा हैं लेकिन तेज बारिश और नदी में पानी के तेज बहाव के चलते बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधि समेत ग्रामीण लंबे समय से नदी पर पुल बनाने कि मांग कर रहे हैं लेकिन उनकी इस मांग पर केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं।
मजदूरों के सामने रोजगार का संकट-
आदिवासी बाहुल्य के दूरदराज गांवो से सैंकड़ो मजदूर रोजाना मजदूरी की आस में सरूपगंज आते हैं।रोजाना हजारो की तादाद में टेम्पो-टैक्सी व अन्य वाहनों में सवार होकर काम की तलाश में सरूपगंज आते हैं।जिसको जहां आवश्यकता होती हैं वो इन्हे मजदूरी तय कर इन्हे ले जाता हैं।यही कारण हैं आम दिनों में सरूपगंज कस्बे के सुभाष सर्किल पर सुबह सुबह हजारों की तादाद मजदूर देखने को मिलते।
पिछले कुछ दिनों से पूरे वेग से बह रही रोहिड़ा की सुकड़ी नदी की वजह से आवागमन बंद हैं। ऐसे में दर्जनों गांवो का सम्पर्क टूट गया हैं। ऐसे में इन मजदूरों के लिए आजीविका चलाना भी काफी मुश्किल हो गया है।
भजनलाल सरकार ने दूसरे बजट में नदी पर पुलिया बनाने की घोषणा-
प्रदेश की भजनलाल सरकार ने इसी साल अपने दूसरे बजट में रोहिड़ा की सुकड़ी नदी पर पुलिया बनाने के लिए 12 करोड़ 10 लाख रूपये की घोषणा की हैं।दरअसल सुकड़ी नदी का वर्तमान पुलिया एनएचएआई की परिधि में आ रहा था। लगातार पुल की मांग उठाई जा रही थी लेकिन मामला एनएच से जुड़ा होने की वजह से राज्य सरकार के हाथ में नहीं था कुछ। ऐसे में पिंडवाड़ा-आबू विधायक समाराम गरासिया, प्रधान नितिन बंसल ने बीच का रास्ता निकालते हुए पुल को महादेव मंदिर के पास बनाना तय किया गया। लगातार प्रयास के चलते प्रदेश की भजनलाल सरकार ने अपने दूसरे बजट में पुलिया बनाने की घोषणा की थी।
बरसात में करीब 100 गांवो का टूट जाता हैं संपर्क-
आपको बता दे कि रोहिड़ा गांव में बरसात के मौसम में तेज बारिश और सुकड़ी नदी में पानी के तेज बहाव के चलते सनवाडा आर, भुला,कूकावास, झेड, मांडवा, कोटड़ा समेत आदिवासी आंचल के करीब सौ गांवो का संपर्क पिंडवाड़ा उपखंड समेत सरूपगंज-रोहिड़ा से पूरी तरह कट जाता हैं। ऐसे में किसी के बीमार होने या आपात स्थितियों में गांव से बाहर निकलना नामुमकिन सा हो जाता हैं। यही कारण हैं कि कई बार बीमार के अस्पताल नहीं पहुंचने और ईलाज के अभाव में जान तक चली जाती हैं।
नहीं हैं कोई वैकल्पिक मार्ग-
रोहिड़ा-भुला-कोटड़ा को जोड़ने वाला यह एकमात्र रास्ता हैं।नदी पर पानी के तेज बहाव के चलते करीब सौ गांवो का संपर्क टूट गया हैं।
इनका कहना हैं –
-रोहिड़ा की सुकली नदी पर पुलिया निर्माण की बजट सत्र में घोषणा की गई है। पुलिया निर्माण के लिए करीब 12 करोड़ 10 लाख रूपये स्वीकृत हुए हैं। आगामी समय में जल्द ही पुलिया का काम शुरू होगा जिससे लोगों को राहत मिलेगी।
पवन राठौड़, सरपंच रोहिड़ा।
-हर बार बरसात के मौसम में तेज बारिश के बाद नदी पर पुल हो होने से आदिवासी आंचल के करीब सौ गांवो का सरूपगंज और पिंडवाड़ा उपखंड मुख्यालय से संपर्क टूट जाता हैं। नदी पर पुल बन जाने से राहत मिलेगी।
कन्हैयालाल अग्रवाल, पूर्व सरपंच भुला।
-बरसात के मौसम में तेज बारिश के बाद सुकली नदी पर पानी के तेज बहाव के चलते आसपास के दर्जनों गांवो के ग्रामीणों की जिंदगी थम सी जाती है।कई बार जनप्रतिनिधियों से मांग कि लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई हैं।
रतन प्रजापत,महामंत्री भाजपा युवा मोर्चा।
प्रत्येक साल बारिश के मौसम में तेज बारिश के बाद आदिवासी आंचल के दर्जनों गांवो का उपखंड मुख्यालय से संपर्क टूट जाता हैं।ऐसे में शिक्षा, चिकित्सा समेत रोजमर्रा के भी काम नहीं हो पा रहे हैं। सरकार ने घोषणा तो की हैं लेकिन धरातल पर काम हो तब होगा उपयोगी।
रामसिंह सिसोदिया, अध्यक्ष, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी माउंट आबू
-सुकली नदी में पानी की आवक और तेज बहाव के चलते दर्जनों गांवो का रोहिड़ा-सरूपगंज से संपर्क कट जाता हैं। बिमारी व गर्भवती महिलाओं को उपचार तक नहीं मिल पाता हैं। कई बार जान तक चली जाती हैं।विधायक, सांसद व सरकार से आग्रह की जल्द समस्या का समाधान हो।
रतन रावल,समाजसेवी रोहिड़ा।



