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फागोत्सव के मंच पर झूमे कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत, लोक कलाकारों के बीच किया गमछा डांस

  • अविनाश गहलोत का गमछा डांस: बालोतरा में फागोत्सव के दौरान कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने फाग गीतों पर जमकर डांस किया।
  • गैर नृत्य की झलक: आंगी गैर और जत्था गैर दलों ने अपनी प्रस्तुतियों से हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
  • फूलों की होली का आनंद: चरी और अग्नि नृत्य के साथ फूलों की होली ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया।
Cabinet Minister Avinash Gehlot's Dance at Balotra's Holi Festival

राजस्थान की राजनीति में जहां एक ओर सियासी समीकरण बदल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष के नेता जनता से जुड़ाव के नए तरीके खोज रहे हैं। इसी कड़ी में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत बालोतरा के फागोत्सव समारोह में पहुंचे, जहां वे न सिर्फ गैर नृत्य और फाग गीतों का आनंद लेते दिखे, बल्कि उन्होंने खुद भी लोक कलाकारों के साथ मंच पर झूमकर एक अलग ही राजनीतिक संदेश दिया।

बालोतरा में आयोजित इस भव्य समारोह में 7 दिवसीय होली फागोत्सव का समापन हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में दर्शक और लोक कलाकार मौजूद रहे। क्षेत्र के प्रसिद्ध आंगी गैर और जत्था गैर ने अपने शानदार प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। खास बात यह रही कि यहां प्रदर्शन करने वाले लोक कलाकार दिल्ली, मुंबई और हिमाचल में राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुति दे चुके हैं, जिससे इस आयोजन का महत्व और बढ़ जाता है।

अग्नि नृत्य और फूलों की होली ने मोहा मन, बड़ी संख्या में जुटे दर्शक

फागोत्सव सिर्फ गैर नृत्य तक सीमित नहीं था। इस दौरान अग्नि नृत्य, चरी नृत्य और फूलों की होली जैसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी लोगों को रोमांचित किया। राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन इस आयोजन में देखने को मिला। कार्यक्रम का आयोजन माली समाज संस्थान, डेजर्ट ट्रेडिशन आर्ट और यूथ सेंटर के सहयोग से किया गया था, जिसमें विभिन्न जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी देखने को मिली।

“राजस्थान की कला-संस्कृति ने बनाई अलग पहचान”

कार्यक्रम के दौरान जब मंत्री अविनाश गहलोत कलाकारों के बीच पहुंचे, तो वे खुद को रोक नहीं पाए और मंच पर कलाकारों के साथ जमकर नाचे। उन्होंने इस आयोजन को न सिर्फ मनोरंजन बल्कि लोक संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री भी कहते हैं कि देश की कला और संस्कृति को बचाने की जिम्मेदारी हर नागरिक की है। राजस्थान ने अपनी अनूठी लोक कला और संस्कृति के दम पर विश्व स्तर पर पहचान बनाई है। यहां का लोक संगीत और नृत्य अपनी अलग पहचान रखते हैं।”

फागोत्सव को लेकर मंत्री गहलोत ने कहा कि राजस्थान की कला और संस्कृति हमारी धरोहर है। नई पीढ़ी को लोक कला से जोड़ने के प्रयास सराहनीय हैं। लोक कलाकारों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार हर संभव मदद करेगी।

राजनीति और लोक संस्कृति का समीकरण!

गहलोत का इस तरह जनता और कलाकारों के बीच घुल-मिलकर नाचना और लोक कला को बढ़ावा देने की बात करना राजनीतिक रूप से भी अहम संकेत देता है। यह दिखाता है कि राजस्थान सरकार न सिर्फ लोक संस्कृति को महत्व दे रही है, बल्कि जनता से जुड़ाव बढ़ाने के लिए पारंपरिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी भी निभा रही है।

राजनीति और लोक संस्कृति का यह संगम आने वाले चुनावों से पहले मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश देने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है। क्या गहलोत का यह कदम राजस्थान की सियासी ज़मीन पर कोई नई लकीर खींचेगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा!

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