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SDM के मातहतों ने बताया प्रतिबंधित श्रेणी, MT ABU पालिका ने जारी कर दिया पट्टा

  • माउण्ट आबू नगर पालिका की अनियमितता
  • प्रशासन शहरों के संग जारी कर दिया प्रतिबंधित क्षेत्र में पट्टा
  • राजस्व विभाग की संस्तुति की दरकिनार
  • प्रतिबधित क्षेत्र के पट्टे पर एनओसी भी जारी की
माउण्ट आबू के हेटमजी का खसरा नम्बर 139 जो प्रतिबधित खसरे में था।

माउण्ट आबू। प्रशासन शहरों के संग 2021 अभियान के तहत माउण्ट आबू में नगर पालिका के द्वारा पट्टा जारी करने में भारी अनियमितता करने के आरोप लगे। इसके लिए पक्ष प्रतिपक्ष के नेताओं ने आरोप प्रत्यारोप भी लगाए और ज्ञापनबाजी भी हुई। लेकिन, हाल में जो दस्तावेज बाहर आए हैं वो इन आरोपों की पुष्टि करते हुए नजर आ रहे हैं कि प्रशासन शहरों के संग अभियान में प्रतिबंधित की गई भूमियों के नगर पालिका के प्राधिकृत अधिकारी ने इन्हीं भूमि के पट्टे जारी कर दिए। इसी तरह का एक पट्टा सामने आया है।

माउण्ट आबू में खसरा संख्या 139 के जारी किए गए पट्टे पर किए गए हस्ताक्षर।

ये खसरा बताया था प्रतिबंधित

प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत माउण्ट आबू उपखण्ड अधिकारी के मातहत आने वाले नगर पालिका माउण्ट आबू के राजस्व गांवों के खसरा नम्बर की सूची फ्लेक्स के जरिए प्रदर्शित की थी। इसमें हेटमजी, माच गांव, ढूंढाई, सानीगांव, देलवाडा, गोवागांव व तोरणा के करीब दो सौ से ज्यादा खसरा नम्बर शामिल थे। हेटमजी गांव के करीब 34 खसरा प्रतिबंधित श्रेणी में थे।

इसी में शामिल था खसरा नम्बर 139। माउण्ट आबू नगर पालिका के द्वारा जारी किए गए पट्टों में से जो पट्टे हमारे पास आए हैं उनमें इसी खसरा नम्बर का एक पट्टा जारी किया हुआ है। इस खसरा संख्या में 40 गुणा 70 का ये पट्टा नगर पालिका माउण्ट आबू के द्वारा 15 मार्च 2024 को आयुक्त और पालिकाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर के साथ फ्री-होल्ड पट्टा जारी कर दिया गया। इसे सितम्बर 2024 में पंजीकृत भी करवा दिया गया।

माउण्ट आबू में प्रशासन शहरो के संग अभियान के तहत शिविरों में लगाया प्रतिबंधित खसरों का बैनर।

फ्लेक्स पर बाकायदा किया था प्रदर्शित

प्रशासन शहरों के संग अभियान में उपखण्ड अधिकारियों को संबंधित नगर पालिकाओं का प्रभारी नियुक्त किया था। राजस्व के प्रभारी होने के नाते उपखण्ड अधिकारियों को ये जानकारी थी कि किस तरह की भूमि पट्टा देने योग्य है और किस तरह की योग्य नहीं है। माउण्ट आबू सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ईको सेंसेटिव जोन है। ऐसे में इसके जोनल मास्टर प्लान में तो इसका स्पष्ट उल्लेख भी है कि किस तरह की भूमि पर निर्माण होगा और किस पर नहीं।

प्रशासन शहरों के संग अभियान में आवासीय भूमि के लिए ही पट्टा जारी होता है ऐसे में माउण्ट आबू में ये स्पष्ट था कि किस तरह की भूमि पर निर्माण प्रतिबंधित है। इस तरह की भूमि को उपखण्ड अधिकारी माउण्ट आबू के मातहत भू अभिलेख निरीक्षक और पटवारी ने चिन्हित कर लिया था जिन पर जोनल मास्टर प्लान के तहत निर्माण प्रतिबंधित है। इसकी सूचना प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत फ्लेक्स के माध्यम से प्रदर्शित कर दी थी। इसके बावजूद माउण्ट आबू नगर पालिका के तत्कालीन आयुक्त ने इस तरह की भूमि का पट्टा जारी कर दिया।

इस श्रेणी की है ये भूमि

भू राजस्व विभाग की जमाबंदी के अनुसार हेटमजी का खसरा संख्या 139 का कुल क्षेत्रफल 0.2403 हैक्टेयर यानि कि 0.937 बीघा और करीब 25 हजार 800 वर्गफीट का है। ये भूमि नगर पालिका माउण्ट आबू के नाम से गैर मुमकिन चट्टान के रूप में दर्ज है। इसमें से ही 2800 वर्गफीट का पट्टा पालिकाध्यक्ष और आयुक्त के संयुक्त हस्ताक्षर के साथ जारी किया गया है।

ठंडा करके खाने की नीति

इस पट्टे की जारी करने में बड़ी होशियारी बरती गई है। लेकिन, राजस्व विभाग हो या नगर निकाय। जमीने अपने ऊपर अनियमितता के निशान छोड़ देती हैं। माउंट आबू के खसरा नंबर 139 की जमीन तो चट्टान है, इस पर के निशान तो बारिश आंधी तूफान में भी साफ नहीं होते। जब वार्डवार प्रशासन शहरों के संग अभियान लगा था तब प्रतिबंधित जमीनों को सूची का बैनर हर कैंप में लगा दिया गए था। आइए में उस समय ऐसे पट्टे जारी करने से विवाद होने की संभावना थी।

लेकिन पत्रावलिया उस समय आ चुकी होंगी। सरकार बदली तब भी प्रशासन शहरों के संग अभियान मार्च तक जारी रखा गया। सरकार बदले तो माउंट आबू के उपखंड अधिकारी और दूसरे कार्मिक भी बदले। ऐसे में पहले क्या आदेश थे क्या नहीं किसी को ध्यान नहीं। इसी मौके पर चौका मरते हुए ये पट्टा जारी कर दिया गया। जिस तरह अंतिम। पांच ओवरों में बैट्समैन टारगेट पूरा करते है माउंट आबू नगर पालिका ने भी अंतिम महीने में इस तरह से टारगेट निपटाए।

सिर्फ एक ही पट्टा तो नहीं होगा

ये भूमि गैर मुमकिन चट्टान और प्रतिबंधित होने के अलावा नगर पालिका के नाम से दर्ज है। ऐसे में ये संभव है कि ये पट्टा अतिक्रमण नियमन के तहत जारी किया गया हो। इस पट्टे की भूमि को निकालने के बाद इस खसरा में ही करीब 23 हजार वर्गफीट भूमि और बचती है। ऐसे में संभव है कि इसी खसरे में और भी पट्टे पालिकाध्यक्ष और आयुक्त के द्वारा जारी किए गए हों। उपखण्ड अधिकारी के निर्देश को दरकिनार करके माउण्ट आबू नगर पालिका अध्यक्ष और आयुक्तों के साथ जारी किए गए पट्टों की जांच की जाए तो सरकार को राजस्व और नियमों का चूना लगाने वाले कई पट्टे बाहर आ सकते हैं।

जारी कर दी एनओसी भी

माउण्ट आबू में जिन लोगों को पूर्व में ही मकान और पट्टे है उनको नगर पालिका के द्वारा एनओसी लेने में पसीने छूट जाते हैं। लेकिन, माउण्ट आबू के नगर पालिका की इस पट्टाधारक पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान है। प्रतिबंधित खसरों में पट्टा जारी करने के अलावा इस पट्टाधारक को नगर पालिका ने पानी और बिजली के कनेक्शन के लिए अनापत्ति जारी कर दी है।

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