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जवाहर सिंह बेढम के बयान से बढ़ा विवाद: उर्दू शिक्षक संघ बोला- कांग्रेस के समय संस्कृत की जगह उर्दू शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई थी

  • उर्दू शिक्षक संघ ने मंत्री के बयान को भ्रामक बताया।
  • शिक्षा विभाग ने आदेशों को क्षेत्रीय जरूरतों पर आधारित बताया।
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राजस्थान में शिक्षा से जुड़े विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं। हाल ही में जवाहर सिंह बेढम के बयान ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने संस्कृत शिक्षकों को हटाकर उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति की थी, जिसे अब समाप्त किया जाएगा।

उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति पर सरकार की सफाई

शिक्षा विभाग के आदेशों के मुताबिक, जयपुर और बीकानेर के सरकारी स्कूलों में तीसरी भाषा के रूप में उर्दू को बंद कर संस्कृत को शामिल करने का निर्णय लिया गया है। गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम के अनुसार, यह फैसला शिक्षा में स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है।

उन्होंने कहा, “हम उर्दू शिक्षकों के पदों को समाप्त करेंगे क्योंकि यह भाषा अब स्थानीय छात्रों के लिए प्रासंगिक नहीं है।” हालांकि, इस बयान को लेकर उर्दू शिक्षक संघ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

उर्दू शिक्षक संघ का जवाब

उर्दू शिक्षक संघ के अध्यक्ष अमीन कायमखानी ने मंत्री के बयान को गलत और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने संस्कृत शिक्षकों की जगह उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति कभी नहीं की।

संघ का कहना है कि यह फैसला मुस्लिम समुदाय और उर्दू भाषा के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है। संघ ने सरकार से इस आदेश को वापस लेने की मांग की है।

शिक्षा विभाग की स्थिति स्पष्ट

शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष मोदी ने कहा कि यह आदेश सभी स्कूलों पर लागू नहीं होता। उन्होंने बताया कि बीकानेर के नापासर में सिर्फ एक छात्र उर्दू पढ़ता है, इसलिए वहां उर्दू को तीसरी भाषा के रूप में हटाया गया।

महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, जयपुर में भी इसी प्रकार का आदेश जारी किया गया है, जिसमें संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में शामिल करने की बात कही गई है।

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