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सांडेराव ठिकाने के ठाकुर शिवशक्ति सिंह का निधन: गौड़वाड़ क्षेत्र में शोक की लहर

Rajasthan | सांडेराव ठिकाने के ठाकुर शिवशक्ति सिंह ने शनिवार को अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुनते ही पूरे गौड़वाड़ क्षेत्र में शौक की लहर पसर गई। खबर सुनते ही गौड़वाड़ के गणमान्य लोगों ने सांडेराव पहुंचकर ठाकुर शिवशक्ति सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार को ढांढस बंधाया।

निधन के बाद क्षेत्र के लोगों ने शिवशक्ति सिंह के व्यक्तित्व को याद करते हुए गौड़वाड़ क्षेत्र की संस्कृति और भाईचारे को बनाए रखने में उनके उल्लेखनीय योगदान को याद किया। ग्रामीणों में शिवशक्ति सिंह की सादगी, सज्जनता और विनम्रता की चर्चा है। चर्चा यह भी है सांडेराव ठिकाना रियासतकाल से लेकर लोकतान्त्रिक व्यवस्था तक गौड़वाड़ की विरासत और धरोहर का एक जीता जागता उदाहरण था जिसे ठाकुर शिवशक्ति सिंह ने आगे बढ़ाया।

गौरतलब है कि सिसोदिया वंशजों का सांडेराव ठिकाना 500 से अधिक वर्षों से इतिहास, बलिदान और बहादुरी का पर्याय रहा है। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि यह ठिकाना महाराणा प्रताप के छोटे भाई शार्दूल सिंह के वंशजों को मिला था। इससे पहले यह ठिकाना चौहानों के पास था लेकिन महाराणा प्रताप के छोटे भाई शार्दूल सिंह ने चौहानों को युद्ध में पराजित कर यह ठिकाना हासिल किया था। बाद में शार्दूल सिंह ने हल्दीघाटी के युद्ध में अपना बलिदान दिया उसके बाद इस ठिकाने के साथ एक स्वर्णिम इतिहास भी जुड़ गया। यहां के ठाकुर दलपत सिंह ने निंबेश्वर महादेव के विशाल मंदिर का निर्माण करवाया जो इस क्षेत्र में आध्यात्मिक आस्था का बड़ा केन्द्र है। गौड़वाड़ क्षेत्र का सबसे बड़ा ठिकाना होने के साथ ही सांडेराव सदियों के त्याग, बलिदान, शौर्य के साथ ही गौड़वाड़ क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और भाईचारे का मजबूत स्तंभ रहा है।

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