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दिल्ली-मुंबई हाईवे पर खुलेआम लूट! ‘वर्दीधारियों’ की रोजाना 15 से 25 लाख रुपये की अवैध वसूली, जिम्मेदार बने मूकदर्शक!

  • दिल्ली-मुंबई हाईवे पर खुलेआम अवैध वसूली – हर रोज़ 15,000 से ज्यादा वाहनों की आवाजाही, हर ट्रक से 300-500 रुपये तक वसूले जा रहे।
  • कैमरे में कैद हुआ भ्रष्टाचार – FirstRajasthan की टीम ने मौके पर जाकर अवैध उगाही को अपने कैमरे में रिकॉर्ड किया।
Massive Corruption on Delhi-Mumbai Highway

देश के सबसे ज्यादा ट्रैफिक वाले नेशनल हाइवे यानी दिल्ली-मुंबई राजमार्ग के राजस्थान-गुजरात सरहदी मावल से रोजाना करीब 15 हजार से अधिक वाहनों का आवागमन होता हैं अगर भारी वाहनों की बात करें तो इस राजमार्ग पर रोजाना करीब पांच से छह हजार मालवाहक वाहनों का दबाव रहता हैं।इन सभी मालवाहक वाहनों को इस राजमार्ग पर आरटीओ चेक नाके को पार करने के लिए चुकानी पड़ती हैं क़ीमत। प्रत्येक मालवाहक वाहन से एंट्री के नाम पर तीन सौ से पांच सौ रूपये की आरटीओ इंस्पेक्टर के वर्दी और निजी लुटेरे वसूल कर रहे हैं।

फर्स्ट राजस्थान के कैमरे में कैद

आरटीओ इंस्पेक्टर और उनकी टीम द्वारा हाईवे पर खुली लूट मचाने की सूचना के बाद फर्स्ट भारत की टीम ने पहुंचकर लूट के इस खेल को अपने कैमरे में बखूबी कैद किया।तस्वीरों में आप इन लुटेरों के रूपये लेने की अदा देखकर चौक जाएंगे क्यूंकि चलते वाहन की खिड़की से चालक हाथ बाहर निकालता हैं और यह लुटेरे अपने ही अंदाज में उसे बटोरने में पारंगत होने का प्रमाण दे रहे हैं।अलग-अलग तस्वीरों और विजुअल्स को देखकर आपको समझ आएगा इनकी एंट्री फीस के नाम पर चल रहा लूट का खेल।

वर्दी वालों के साथ निजी लोग भी कर रहे वसूली

हमारी टीम जब मावल चेक नाके पर पहुंची तो वहां आरटीओ इंस्पेक्टर के वर्दी वाले लुटेरों के साथ निजी लोग भी हाथ में डंडे लिए मालवाहक वाहनों को रुकवाकर एंट्री फीस वसूल रहे थे। सड़क किनारे अपने वाहन को खड़ा कर इंस्पेक्टर गाड़ी की सीट पर राजाशाही अंदाज में आराम फरमाते दिख रहे थे वहीं कई ट्रक ड्राइवर उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े थे।कई वाहन बिना एंट्री दिए फर्राटे भर देते तो यह लुटेरों उनके वाहनों पर डंडे भी बरसा रहे नजर आ रहे थे।

ड्राइवर बोले- अगर रुपये नहीं देंते तो बेवजह गाड़ी सीज कर देंगे

आरटीओ की इस टीम की वसूली पर कई ट्रक ड्राइवरों ने एंट्री देने में आनाकानी की तो स्टाफ ने वाहन के बोनट समेत अन्य जगहों पर डंडे बरसाए और एंट्री देने को कहा जिस पर ड्राइवरों ने गाड़ी के तमाम कागजात फिट होने का हवाला दिया साथ ही अंडर लोड होने व हाइट भी तय मापदंड के अनुसार होना बताया तो स्टाफ ने डांट डपटकर उनसे वसूली कर ही ली।हमनें इस पूरे दृश्य को देखा था ऐसे में वाहन जब चेक नाका पारकर आगे पहुंचा तो हम भी वाहन के पीछे गए और ड्राइवरों से बात की तो ड्राइवरों ने एक सुर में बताया की हमसे तीन सौ रूपये लिए किसी ने बताया की पांच सौ रूपये लिए है। ड्राइवरों ने बताया की अगर रूपये नहीं देते तो बेवजह फर्जी चालान बना देते और गाड़ी को सीज कर देते साथ ही मारपीट भी करते। यह तो इनका रोज का हैं इनका क्या बिगड़ता है।

ऐसे समझें गणित

राष्ट्रीय राजमार्ग 27 यानी दिल्ली-मुंबई को जोड़ने वाला राजमार्ग।देशभर में सबसे अधिक वाहनों के दबाव वाले राजमार्ग से एक है यह राजमार्ग।मावल चेक नाके से रोजाना पांच हजार से अधिक भारी वाहन गुजरते है और आरटीओ के वसूलीबाज इन वाहनों से 300 से 500 रूपये प्रत्येक वाहन वसूलते है। ऐसे में रोजाना 15 से 25 लाख रूपये तक यह टीम इन वाहनों से वसूल रही हैं।एक महीने में यह रकम करोड़ो में जाती हैं और लगभग पांच से सात करोड़ के आंकड़े को छुती हैं। यही कारण हैं इन आरटीओ इंस्पेक्टर पर आलाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की रहमत बरकरार हैं। सूत्रों की माने तो यह पैसा ऊपर तक जाता हैं। ऐसे में इन पर कार्रवाई करने से परहेज किया जाता हैं।

वसूली के चलते वाहनों की लंबी कतार

राजस्थान-गुजरात सरहद के इस चेक नाके पर परिवहन विभाग की एंट्री फीस वसूली के चलते राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतारे देखने को मिल रही हैं।राजमार्ग पर भारी जाम की स्थिति बन रही हैं लेकिन परिवहन विभाग को इससे कोई सरोकार नहीं हैं। विभागीय अधिकारी-कर्मचारी व निजी कर्मचारी इन दिनों माया के मायाजाल में इस तरह मदहोश हैं की उन्हें एम्बुलेंन्स और उनमें जा रहे मरीजों तक की चिंता नहीं हैं।

प्रभावशाली लोगों के वाहनों से नहीं लेते एंट्री फीस

सूत्रों की माने तो परिवहन विभाग के कई अधिकारीयों व कर्मचारियो समेत प्रभावशाली नेताओं के भी मालवाहक ट्रके हैं ऐसे में इन लोगों के ट्रको से किसी प्रकार की कोई वसूली नहीं की जाती हैं। प्रभावशाली लोगों के ख़ास लोगों पर भी विभाग की मेहरबानी बरकरार हैं।

सांसद-विधायकों की चुप्पी, खड़े हो रहे सवाल

पूरे मामले में अगर सांसद व विधायकों की भी बात करें तो यह पूरा खेल इनके नॉलेज में हैं लेकिन लूट के इस खेल पर इनकी चुप्पी अंदरूनी शह की ओर ईशारा कर रही हैं। जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधियों से आमजन को उम्मीद रहती हैं कि कहीं प्रताड़ित होने पर हमें न्याय दिलाया जाएगा लेकिन क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने आमजन की इस उम्मीद को धूल धुश्रित करने के अलावा कुछ नहीं किया।इसी राजमार्ग से सांसद व विधायक कई बार गुजरे होंगे लेकिन उन्होंने इसको लेकर संज्ञान लेना उचित नहीं समझा या फिर इनकी चुप्पी की वजह इसका कुछ हिस्सा इनकी जेब तक भी पहुंचना हो सकता हैं।

नियमानुसार RTO इंस्पेक्टर का होता हैं यह काम

आरटीओ इंस्पेक्टर सड़कों पर सभी गाड़ियों को चेक कर यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई वाहन बिना टैक्स चुकाए नहीं चले। बिना टैक्स चलाए सड़क पर चलने वाले वाहनों से जुर्माने सहित टैक्स वसूल करें और बाकायदा इसकी रसीद भी दीं जाए।

वाहन के असल प्रारूप से किसी प्रकार की छेड़छाड़ कर कोई मॉडिफिकेशन की भी जांच करने का जिम्मा होता हैं। वाहन के फिटनेस, बीमा और पीयूसी में किसी प्रकार की कोई खामी हो तो इसका जुर्माने वसूलने की भी जिम्मेदारी हैं। निर्धारित मापदंड से अधिक वजन ढोने वाले वाहन से हेवी पेनल्टी के साथ जुर्माना वसूलने की जिम्मेदारी हैं।इस दौरान वसूले गए जुर्माने की ऑनलाइन चालान कांटकर चालक को देना होता हैं।

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