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म्यांमार में साइबर स्लेवरी का खुलासा, राजस्थान पुलिस और इंटरपोल ने भारतीय बंधकों का किया रेस्क्यू

  • म्यांमार के जंगलों में IT पार्क से 24 भारतीय युवाओं को रेस्क्यू किया गया।
  • इंटरपोल और म्यांमार सेना ने 20 फरवरी को इन बंधकों को मुक्त कराया।
  • युवाओं को साइबर ठगी में फंसाकर 87 लाख रुपए का टारगेट दिया गया।
  • राजस्थान के 31 युवकों को अब तक रेस्क्यू किया जा चुका है।
Indian youth rescued from Myanmar IT parks after being held as cyber slaves

आईटी सेक्टर में अच्छे वेतन और उज्जवल भविष्य का सपना लेकर विदेश जाने वाले भारतीय युवाओं के लिए यह सपना एक बुरे सपने में बदल रहा है। म्यांमार के जंगलों में बंधक बनाकर इन युवाओं को साइबर ठगी करने पर मजबूर किया जा रहा है। जयपुर लौटे 24 युवाओं की दर्दभरी दास्तान ने इस गंभीर समस्या को उजागर किया है।

म्यांमार में बंधक बने युवाओं का रेस्क्यू
इंटरपोल और म्यांमार सेना ने मिलकर एक आईटी पार्क से इन युवाओं को रेस्क्यू किया। यहां उन्हें ठगी की ट्रेनिंग दी जाती थी और एक अनुबंध के तहत 87 लाख रुपये की ठगी करने पर 7 लाख रुपये का इन्सेंटिव दिया जाता था। यह राशि भी पूरी नहीं दी जाती थी और 20% काटकर एक साल बाद भुगतान करने का वादा किया जाता था।

जयपुर लौटे इन 24 युवकों में से अधिकांश राजस्थान के विभिन्न जिलों से हैं, जिनमें डीडवाना, झुंझुनूं, सिरोही, कोटा, हनुमानगढ़, चूरू, जोधपुर और जयपुर के निवासी शामिल हैं। यह सभी 540 भारतीयों का हिस्सा थे, जिन्हें अलग-अलग राज्यों से म्यांमार ले जाया गया था।

सोशल मीडिया पर ठगी की ट्रेनिंग

इन युवाओं को सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर ठगी करने की ट्रेनिंग दी गई। ठगी से प्राप्त रकम को ‘बिल ओपन करना’ कहा जाता था। अगर समय पर यह ‘बिल’ पूरा नहीं होता, तो पहले आर्थिक दंड और फिर शारीरिक प्रताड़ना दी जाती थी।

युवाओं को केवल मैसेज के जरिए ठगी करनी होती थी। यदि पीड़ित वॉयस या वीडियो कॉल करता, तो किसी महिला मॉडल से बात कराई जाती थी। कुछ राजस्थान के युवाओं को यूएस में रहने वाले भारतीयों को निशाना बनाने का लक्ष्य दिया गया था।

गुजरात के शख्स ने फंसाया, म्यांमार में अभी भी सक्रिय

रेस्क्यू किए गए युवाओं ने बताया कि उन्हें गुजरात के हितेश नामक व्यक्ति ने इस जाल में फंसाया था। वह खुद म्यांमार में रहकर इस गिरोह का हिस्सा है। थाईलैंड एयरपोर्ट से युवाओं को सड़क मार्ग से म्यांमार ले जाया गया और एक जंगल में बहुमंजिला इमारतों में बंधक बना दिया गया।

राजस्थान पुलिस ने दी सख्त चेतावनी

रेस्क्यू किए गए युवाओं को राजस्थान पुलिस ने सख्त निर्देश दिए हैं कि वे ठगी की ट्रेनिंग को भूल जाएं और इस तरह की गतिविधियों में दोबारा शामिल न हों। इन सभी का मेडिकल चेकअप करवाकर परिजनों को सौंपा जा रहा है।

म्यांमार के जंगलों में बना साइबर ठगी का अड्डा

म्यांमार के जंगलों में स्थित आईटी पार्क, जहां इन युवाओं को बंधक बनाया गया था, साइबर ठगी का अंतरराष्ट्रीय हब है। यहां केके-1 से केके-5 नाम के पांच सेंटर हैं, जहां भारत, चीन और पाकिस्तान के नागरिकों को ठगी के काम में लगाया जाता है।

इस घटना ने न केवल विदेश में नौकरी करने की लालसा के खतरों को उजागर किया है, बल्कि साइबर अपराध के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर भी सवाल खड़े किए हैं।

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