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जालोर और पाली में चुनाव : जसराज पुरोहित जालोर में और सुनील भंडारी पाली में बने भाजपा अध्यक्ष

जयपुर | राजस्थान के जालोर और पाली जिलों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के जिलाध्यक्षों के चुनाव हाल ही में संपन्न हुए, जिसमें जालोर में जसराज पुरोहित और पाली में सुनील भंडारी को संगठन की कमान सौंपी गई है।

यह नियुक्तियां प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की घोषणा के साथ आईं। लेकिन इन घोषणाओं के पीछे की राजनीतिक गणित और अंदरखाने चल रही रणनीति पर चर्चा करना ज़रूरी हो जाता है।

जसाराज पुरोहित: जालोर में संतुलन साधने की कोशिश
जालोर जैसे क्षेत्र में, जहां जातीय समीकरण और संगठनात्मक शक्ति का तालमेल ज़रूरी है, जसराज पुरोहित का चयन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पुरोहित समुदाय का प्रभाव क्षेत्र में अच्छा खासा है, और उनके चयन से पार्टी ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठन को निचले स्तर तक मज़बूत किया जाएगा।

भाजपा ने यहां साफ संकेत दिया कि चूंकि इस वर्ग से एक विधायक, चार प्रधान और एक जिला किसान मोर्चा अध्यक्ष हैं। ऐसे में यहां भाजपा की प्राथमिकता पुरोहित समाज ही रहेगा। हालांकि जसराज पुरोहित के नाम के पीछे भीनमाल के पूर्व विधायक पूराराम चौधरी की मजबूत पैरवी और संघ की विश्वसनीयता भी जुड़ी बताई जा रही है। जालोर को करीब 5 साल बाद नया जिलाध्यक्ष मिला है।

घोषणा से पहले ग्रेनाइट एसोसिएशन भवन में सम्बोधन कार्यक्रम हुआ। जिसमें पूर्व जिलाध्यक्ष श्रवणसिंह राव ने कार्यकर्ताओं का आभार जताया। बाद में किसान आयोग अध्यक्ष और नागौर के पूर्व सांसद सीआर चौधरी और विष्णु चेतानी ने जसराज पुरोहित के नाम की घोषणा की। सांचौर से महेंद्रसिंह झाब के पीछे पूर्व सांसद देवजी पटेल का गुट माना जा रहा था।

वहीं रानीवाड़ा क्षेत्र से मुकेश खण्डेलवाल को पूर्व विधायक नारायणसिंह देवल के खेमे का माना जाने लगा। इसी प्रकार जालोर से जोगेश्वर गर्ग के गुट से दीपसिंह धनानी और आहोर से छगनसिंह राजपुरोहित के खेमे से नेमीचंद रावल का नाम चला।

वहीं भीनमाल से पूर्व विधायक पूराराम चौधरी ने जसराज पुरोहित के नाम की पैरवी की। अंत में सभी समीकरण ध्यान में रखते हुए जसराज के नाम पर मुहर लगी। बाली (भीनमाल) निवासी जसराज पुरोहित भाजपा में जिला महामंत्री रहे है। पूर्व प्रधान धुखाराम पुरोहित के भतीज है, लेकिन आपसी वैचारिक मतभेद भी है, जिस कारण पूराराम के विश्वस्तों में से है।

खबरें बताती हैं कि इस पद के लिए कई दावेदार थे। लेकिन जसराज पुरोहित के चयन से साफ है कि पार्टी नेतृत्व ने अपनी नीति को ही प्राथमिकता दी है।

पाली में सुनील भंडारी: युवा चेहरा, नई उम्मीदें
पाली में सुनील भंडारी को जिलाध्यक्ष बनाना यह दिखाता है कि बीजेपी अब युवा नेतृत्व को प्राथमिकता दे रही है। भंडारी, जो कि जमीनी स्तर पर सक्रिय रहे हैं, उनकी छवि एक कर्मठ और जनता के करीब रहने वाले नेता की है।

मगर, यह फैसला आसान नहीं था। पाली में गुटबाज़ी लंबे समय से संगठन के लिए चुनौती रही है। सुनील भंडारी का नाम सामने लाकर पार्टी ने गुटों के बीच एक सामंजस्य स्थापित करने की कोशिश की है। हालांकि यहां मदन राठौड़ ने अपने पसंद को अध्यक्ष बनाकर निश्चित तौर पर यह साबित किया है कि भाजपा की आगामी रणनीति कैसी होगी।

अंदरखाने की कहानी
पार्टी के अंदरखाने से जो खबरें आ रही हैं, वे कुछ और ही कहानी बयां करती हैं। जालोर और पाली, दोनों जगहों पर जिलाध्यक्ष पद के लिए कई वरिष्ठ नेता दावेदारी कर रहे थे। लेकिन अंतिम निर्णय में युवा नेताओं को तरजीह दी गई। पाली में ज्ञानचंद पारख गुट का भविष्य क्या होगा? यह वक्त बताएगा।

क्या संदेश देना चाहती है बीजेपी?
बीजेपी पदाधिकारियों का कहना है कि इन नियुक्तियों के माध्यम से यह संदेश देना चाहती है कि संगठन की मजबूती और समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान देना उसकी प्राथमिकता है। साथ ही, यह निर्णय आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले होने वाले परिसीमन को ध्यान में रखते हुए संगठन के पुनर्गठन का संकेत भी देता है।

जालोर और पाली में नई जिम्मेदारियां मिलने के बाद जसराज पुरोहित और सुनील भंडारी को यह साबित करना होगा कि वे संगठन को जमीनी स्तर पर मज़बूत कर सकते हैं। उनके चयन से पार्टी ने संतुलन और युवाओं को अवसर देने का जो संदेश दिया है, वह आने वाले समय में पार्टी की सफलता या विफलता को तय करेगा।

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