जिला कलेक्टर के संज्ञान के बाद विभाग ने कसी लगाम
सिरोही | किसानों को भ्रमित कर प्रधानमंत्री की योजना के नाम पर बेची जा रही प्रोम खाद की बिक्री पर आखिरकार सोमवार को आधिकारिक रोक लगा दी गई। जिला कलेक्टर के संज्ञान लेने के बाद कृषि विभाग हरकत में आया और आदेश जारी कर दिए।
किसानों को यूं बनाया जा रहा था शिकार
जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक योजना का उद्देश्य किसानों को यूरिया और डीएपी जैसी उर्वरक सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराना है। लेकिन चित्तौड़गढ़ की कानव एग्रो प्रोडक्ट लिमिटेड की ओर से निर्मित और जयपुर की श्री हलधर कोऑपरेटिव सोसायटी द्वारा मार्केटिंग की जा रही खाद को योजना का नाम और लोगो लगाकर किसानों को 1100 से 1300 रुपए में बेचा जा रहा था।
सरकारी खाद की कमी के चलते किसान धोखे में आकर इस खाद को खरीदने को मजबूर हो रहे थे।
शिकायत से लेकर कार्रवाई तक
किसानों ने जिला कलेक्टर को शिकायत की थी। किसानों की शिकायत के बाद लगातार समाचारों का प्रकाशन होने से दबाव बढ़ने पर कृषि विभाग ने जांच शुरू की और कई सहकारी समितियों से बैग जब्त कर लिए। जांच में सामने आया कि पैकेजिंग पर प्रधानमंत्री योजना का नाम और लोगो इस्तेमाल किया गया है, जिससे किसानों को यह सरकारी सब्सिडी वाला खाद प्रतीत होता था।
अब विभाग ने जारी किए सख्त आदेश
कार्यकारी संयुक्त निदेशक (कृषि विस्तार) पन्नालाल चौधरी ने जिले की सभी क्रय-विक्रय सहकारी समितियों और ग्राम विकास सहकारी समितियों को आदेश जारी कर उक्त खाद की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। आदेश में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि किसी समिति द्वारा यह खाद बेची गई तो आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 व एफ.सी.ओ. 1985 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही अग्रिम कार्रवाई के लिए संयुक्त निदेशक कृषि (गु.नि) / (आदान) कृषि आयुक्तालय जयपुर से मार्गदर्शन मांगा गया हैं कि संबंधित फर्म के बैग पर प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना का नाम व लोगो प्रयोग किया गया है। जिसमें किसानों को सरकारी सब्सिडी वाला उत्पाद होने का भ्रम होता है। जो केवल यूरिया, डीएपी व एनपीके सब्सिडी वाले उर्वरकों में ही पैकेजिंग डिजाइन तय होता है।
इनका कहना है
किसानों की शिकायत के बाद विभाग ने यह कार्रवाई की हैं। सभी क्रय विक्रय सहकारी समिति ओर ग्राम सहकारी समितियों को हलधर ब्रांड की खाद नहीं बेचने के निर्देश दिए है। अभी खाद की सेंपलिंग हो रही हैं जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता हैं।
– पन्नालाल चौधरी, कार्यकारी संयुक्त निदेशक, कृषि विस्तार सिरोही



