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राजस्थान विधानसभा बजट सत्र का लेखा जोखा: 14 विधेयक पेश और 10 पारित, पूछे गए 9800 सवाल

  • विधानसभा में 9800 सवाल, लेकिन सीनियर नेताओं की चुप्पी – राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में कुल 9800 सवाल उठे, लेकिन अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे और सचिन पायलट ने एक भी सवाल नहीं पूछा।
  • 14 विधेयक पेश, 10 पारित – 31 जनवरी से 24 मार्च तक चले सत्र में 14 विधेयक पेश किए गए, लेकिन केवल 10 ही पारित हो सके।
राजस्थान विधानसभा सत्र 2025: महत्वपूर्ण बिल और विधायी कार्य

राजस्थान विधानसभा के हाल ही में संपन्न बजट सत्र में विधायकों ने कुल 9800 प्रश्न उठाए, लेकिन प्रदेश के दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे ने एक भी सवाल नहीं पूछा। यह सत्र 31 जनवरी से शुरू होकर 24 मार्च को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

इस सत्र के दौरान राज्य सरकार ने कुल 14 विधेयक पेश किए, लेकिन इनमें से केवल 10 विधेयक ही पारित हो सके। सत्र में कुल 200 विधायकों में से 36 (21.55 प्रतिशत) ने अधिकतम 100 प्रश्नों की सीमा को छुआ, जबकि 131 विधायक (78.45 प्रतिशत) इस संख्या तक नहीं पहुंच सके। 14 विधायकों ने तो 10 प्रश्न भी नहीं पूछे।

गहलोत-पायलट की चुप्पी पर क्या बोले जूली?

जब विपक्ष के नेता टीका राम जूली से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की चुप्पी के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने जवाब दिया, “वे वरिष्ठ नेता हैं और युवा विधायकों को अवसर देने के लिए उन्होंने सवाल नहीं पूछे होंगे।” जूली ने यह भी कहा कि भाजपा की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे ने भी कोई सवाल नहीं उठाया।

‘राजे सरकार के काम से संतुष्ट हैं’

भाजपा प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने कहा कि वसुंधरा राजे दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और पूर्व केंद्रीय मंत्री भी रही हैं। उन्होंने दावा किया कि चूंकि यह भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार है, इसलिए संभवतः वह इसके प्रदर्शन से संतुष्ट हैं, इसलिए उन्होंने कोई सवाल नहीं उठाया।

‘कांग्रेस सदन को युद्ध का मैदान बना रही’

भाजपा प्रवक्ता पंकज मीना ने कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस विधायक विधानसभा को युद्ध का मैदान बना रहे हैं। उनके वरिष्ठ नेता सदन में सवाल उठाने की बजाय सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना पसंद कर रहे हैं।”

सीएम भजनलाल शर्मा ने कसा तंज

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी गहलोत पर तंज कसते हुए कहा, “पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत एक दिन भी विधानसभा में उपस्थित नहीं हुए, लेकिन सोशल मीडिया पर अत्यधिक सक्रिय रहते हैं।” उन्होंने यह टिप्पणी बीकानेर में एक किसान सम्मेलन के दौरान की।

पेपरलेस हुआ विधानसभा सत्र

इस बार राजस्थान विधानसभा के सत्र में डिजिटल क्रांति देखने को मिली। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बताया कि इस सत्र में कागज रहित प्रणाली लागू की गई, जिसके तहत विधायकों को आईपैड उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा, विधानसभा कक्ष को गुलाबी रंग में पुनर्निर्मित किया गया, जो जयपुर के प्रसिद्ध गुलाबी शहर की झलक पेश करता है।

बजट पर चर्चा के लिए अतिरिक्त दिन

राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान 19 फरवरी 2025 को प्रस्तुत किए। इस बार सामान्य बहस के लिए एक अतिरिक्त दिन जोड़ा गया, जिससे कुल बहस के दिन पांच हो गए। इस दौरान 96 विधायकों ने भाग लिया। 27 फरवरी को उपमुख्यमंत्री ने संशोधित बजट पर बहस का जवाब दिया।

विभिन्न विभागों की 64 अनुदान मांगों में से 17 पर आठ दिनों तक चर्चा हुई। इस दौरान विधानसभा को कुल 4319 कटौती प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से 3789 पर चर्चा हुई और 530 को खारिज कर दिया गया।

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