- राजस्थान में लाउडस्पीकर विवाद पर संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल का बड़ा बयान, कहा- “धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए कानून लाने से सरकार पीछे नहीं हटेगी।”
- मंत्री ने सभी धर्मों से कानून के दायरे में धार्मिक रीति-रिवाज निभाने की अपील की, कहा- “अगर कोई कानून नहीं मानता तो सख्त कदम उठाने होंगे।”

राजस्थान में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज नियंत्रित करने को लेकर छिड़ी बहस अब राजनीतिक रंग ले रही है। जोधपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार प्रदेश में अमन-शांति बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।
उन्होंने कहा, “सभी धर्मों को अपनी धार्मिक परंपराओं को कानून के दायरे में रहकर निभाना चाहिए। अगर किसी के रीति-रिवाजों से दूसरों को असुविधा होती है, तो इसे रोका जाएगा।”
‘सेल्फ डिसीजन प्रिंसिपल अपनाएं’
मंत्री पटेल ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्वेच्छा से कानून का पालन करें, ताकि सरकार को मजबूरी में कोई सख्त निर्णय न लेना पड़े। उन्होंने कहा, “अगर हम स्वेच्छा से कानून का पालन करेंगे तो प्रदेश में अमन-शांति बनी रहेगी। लेकिन अगर कोई अपनी धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर दूसरों की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है, तो सरकार को कड़ा रुख अपनाना पड़ेगा।”
‘मजबूरी में सख्त कानून लाने से सरकार पीछे नहीं हटेगी’
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए मंत्री ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो राजस्थान सरकार भी धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि कोई भी धर्मावलंबी ऐसा कदम नहीं उठाएगा जिससे सरकार को बाध्य होकर सख्त नियम लागू करने पड़ें। लेकिन अगर ऐसा हुआ तो हम आवश्यक कदम उठाएंगे।”
क्या कहता है मौजूदा कानून?
राजस्थान में अभी धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर बजाने को लेकर कोई विशेष कानून नहीं है, लेकिन Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000 के तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाना प्रतिबंधित है। कई अन्य राज्यों में धार्मिक स्थलों पर ध्वनि नियंत्रण के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं।
राजनीतिक विवाद के संकेत
मंत्री पटेल के बयान के बाद राज्य में सियासी हलचल तेज हो सकती है। विपक्ष इस मुद्दे को सरकार की धर्मनिरपेक्ष छवि से जोड़ सकता है, जबकि सत्ताधारी दल इसे शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के कदम के रूप में पेश कर सकता है।