- रणथंभौर नेशनल पार्क में बाघिन टी-125 के 8 महीने के शावक की मौत हुई।
- पिछले दो सालों में यहां 17 बाघों की जान जा चुकी है, जिसमें ज्यादातर मौतें टेरिटोरियल फाइट के कारण हुई हैं।
- बाघों की बढ़ती मौतें वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को चुनौती दे रही हैं और पार्क की प्रसिद्धि पर भी असर डाल रही हैं।

राजस्थान के रणथंभौर नेशनल पार्क में बाघों की लगातार होती मौतों ने वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में भदलाव वन क्षेत्र में बाघिन टी-125 के 8 महीने के शावक का शव मिला है। वन विभाग ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
बाघों की मौत का सिलसिला जारी
पिछले दो वर्षों में रणथंभौर नेशनल पार्क में 17 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर मौतें टेरिटोरियल फाइट के कारण हुई हैं। इस बार भी प्रथम दृष्टया बाघ द्वारा हमला किए जाने का शक है। उपवन संरक्षक डॉ. रामानंद भाकर के अनुसार, शनिवार रात नर बाघ टी-2311 को कैमरा ट्रेप में देखा गया था।
मृत बाघों की बढ़ती संख्या चिंताजनक
जनवरी 2023 से दिसंबर 2024 तक 16 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें 2023 में बाघ T-57, T-114 और T-104 समेत 8 बाघों ने दम तोड़ा। वहीं, 2024 में बाघिन T-99 और T-60 समेत कई बाघों की मृत्यु हुई। अब बाघिन टी-125 के शावक की मौत से यह संख्या बढ़कर 17 हो गई है।
वन्यजीव संरक्षण पर सवाल
रणथंभौर नेशनल पार्क बाघों के लिए जाना जाता है, लेकिन बाघों की मौत का यह सिलसिला वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को कमजोर कर रहा है। वन विभाग पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या सुरक्षा और संरक्षण के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं।