पिछले दिनों से वन विभाग में पनप रही भ्रष्टाचार की अमरबेल
फर्स्ट राजस्थान-सिरोही
सरकारी महकमों में भ्रष्ट अधिकारी-कार्मिक भ्रष्टाचार की दीमक को ईमानदारी से खाकर व्यवस्था को खोखला करने पर तुले हुए हैं।कहीं आटे में नमक जितना तो कहीं थोड़ा और थोड़ा और के चक्कर में ईमान बेच रहे हैं।सिरोही जिले के सरकारी महकमें भी आम आदमी को नोंचने में पीछे नहीं हैं।हाल की बात करें तो इन दिनों वन विभाग में इसकी झलक खूब दिखाई दे रही हैं।
वन विभाग के रेंजर पर अवैध जब्ती और रिश्वत मांगने की शिकायत
जोधपुर जिले के करवड गांव निवासी छैलूसिंह ने वन विभाग के रेंजर पर रिश्वत मांगने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्य वन संरक्षक जोधपुर को लिखित शिकायत पेश कर बताया कि मेरी ट्रक संख्या आरजे-19-जीजे-1550 जो कि उदयपुर से शिवगंज जा रही थी। ट्रक में देशी व विलायती बबूल की टीपी फ्री परमिट की लकड़िया भरी हुई थी लेकिन रेंजर व उनके साथ अन्य ने अवैध रूप से मेरी ट्रक को जब्त व बिना जब्ती प्रदर्श लगाए पिंडवाड़ा से धनारी नर्सरी लाकर खड़ा करवा दिया और मेरे ड्राइवर से पांच हजार रूपये ले लिए साथ ही बीस हजार रूपये की ओर मांग की जा रही हैं जबकि मेरी ट्रक में किसी प्रकार की प्रतिबंधित लकड़ी नहीं भरी हुई हैं।उन्होंने शिकायत में बताया कि पिंडवाड़ा रेंजर का उक्त कृत्य राजस्थान वन अधिनियम 1953 की धारा 62 एवं भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम 1988 का उल्लंघन हैं।उन्होंने पिंडवाड़ा रेंजर के खिलाफ कठोर कार्यवाही करवाने और ट्रक को सुपुर्द करवाने की बात कहीं।
आनन-फानन में ट्रक को किया रवाना
22जनवरी बुधवार को देशी व विलायती बबूल की लकड़ियों से भरे ट्रक आरजे-19-जीजे-1550 को सुबह 9 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक धनारी नर्सरी में खड़ा करवाया गया।वाहन चालक भरतसिंह ने पुरे मामले की जानकारी ट्रक मालिक छेलूसिंह को दी और बताया कि रेंजर साहब ने पांच हजार रूपये ले लिए हैं और ट्रक को नर्सरी में खड़ा करवाया हैं।ट्रक मालिक ने वाहन चालक से पूछा की क्यों ख़डी करवाई हैं क्या कारण हैं?? ऐसा हैं तो मेरी बात करवाओ तो रेंजर ने वाहन चालक से कहा कि मै बात नहीं करूँगा तुम तुम्हारे हिसाब से देख लो… इतना सब होने के बाद ट्रक मालिक ने जोधपुर मुख्य वन संरक्षक के सामने व्यक्तिगत पेश होकर पुरे मामले की लिखित शिकायत दे डाली।पुरे घटनाक्रम की भनक जैसे ही रेंजर को लगी तो रेंजर ने नर्सरी में मौजूद गार्ड को फोन कर ट्रक को रवाना करने के लिए कहा ऐसे में गार्ड ने वाहन चालक भरतसिंह को आनन-फानन में रवाना किया और साथ यह भी कहा कि फटाफट निकल और आगे पांच किलोमीटर तक किसी होटल पर भी मत रुकना।
पुरे मामले में गौर करने वाली बात यह हैं कि जब ट्रक में बबूल की लकड़िया भरी हुई थी तो उसे रोककर जांच के बाद रवाना कर देना था लेकिन वन विभाग के रेंजर समेत अन्य कर्मचारियों ने करीब 12 घंटे तक ट्रक को खड़ा रखवाया और जब ऊपर तक मामला पहुंचा तो हाथ-पांव फूल गए।

वन विभाग में पनप रही भ्रष्टाचार की अमरबेल…..
एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार को मिटाने की बात कर रही हैं तो वहीं विभागों के कर्मचारी सरकार के इस ध्येय पर कालीख पोत रहे हैं।अगर हाल की बात करें तो वन विभाग में इन दिनों भ्रष्टाचार की अमरबेल खूब पनप रही हैं।सिरोही में इसी माह की शुरुआत में वनपाल और सहायक वनपाल को रिश्वत मामले में निलंबित किया गया था हालांकि बाद में वनपाल ने राजस्थान उच्च न्यायालय ने निलंबन पर स्थगन आदेश दे दिया था।
नए साल के पहले दिन ही एसीबी में मामला दर्ज-
वर्ष 2025 की शुरुआत एक जनवरी बुधवार को अच्छी शुरुआत नहीं हुई।मान्यता हैं कि बुध यानी शुद्ध और यही मान्यता इस बार भ्रष्टाचार पर वार के तहत सही साबित हुई। साल की पहली तारीख पर ही वन विभाग के वनपाल और सहायक वनपाल के खिलाफ ठेकेदार अता मोहम्मद ने एसीबी सिरोही में मामला दर्ज करवाया था और इसी दिन वन विभाग ने निलंबन की कार्यवाही को अंजाम दिया था। ऐसे में अब जिलेभर में इस बात की भी खूब चर्चा हैं कि शुरुआत भ्रष्टाचार पर वार से हुई है ऐसे में अगर भ्रष्टाचार किया तो ऐसी कार्रवाई आगे भी देखने को मिलेगी।इस बार साल की शुरुआत बुध से हुई है और बुध यानि शुद्ध तो भ्रष्ट अधिकारीयों से विभाग भी शुद्ध हो जाएगा।
करनी थी निगरानी लेकिन अफसरों ने ही छीपाई कारस्तानी-
22 जनवरी को पिंडवाड़ा रेंजर द्वारा देशी व विलायती बबूल की लकड़ी से भरी ट्रक की अवैध जब्ती और रिश्वत मामले की शिकायत ट्रक मालिक छेलूसिंह ने जोधपुर मुख्य वन संरक्षक को सौपी थी। करीब पांच दिन बीत गए लेकिन मुख्य संरक्षक ने भी अवैध ट्रक जब्ती,रिश्वत लेने जैसे गंभीर मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया।पुरे मामले की जानकारी सिरोही वन मण्डल अधिकारी को नहीं हैं ऐसे में यह साबित होता हैं कि मुख्य वन संरक्षक जोधपुर की ओर से जिला मुख्यालय पर जानकारी तक नहीं दी हैं फिर विभागीय जांच भी कहा से होंगी। यह जरूर हैं कि जिस दिन शिकायत हुई उस दिन शाम को ही रेंजर तक इस बात की सूचना पहुंच गई कि पुरे मामले की शिकायत ऊपर तक हो गई है यही कारण था कि ट्रक को आनन-फानन में छोड़ा गया।

पुरे मामले की मुझे जानकारी नहीं हैं। ऐसा कोई भी मामला है और मेरे पास शिकायत आई और दोषी निकला तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।
कस्तूरी प्रशांत सुले
वन मण्डल अधिकारी, सिरोही।
मैंने ट्रक रुकवाई थी लेकिन रिश्वत जैसे आरोप निराधार हैं।
लकड़ियों से भरे ट्रक की सूचना थी तो रुकवाया था और बाद में किसी काम से सिरोही चला गया था,शाम को तस्दीक होने पर गाड़ी को रवाना कर दिया गया था। रिश्वत जैसी कोई बात नहीं थी।
प्रेम प्रकाश
रेंजर, पिंडवाड़ा वन विभाग।