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सूरत में जैन मुनि शांतिसागर रेप केस में दोषी करार, पीड़िता को धार्मिक अनुष्ठान के बहाने बुलाकर किया था दुष्कर्म

  • सूरत की अदालत ने जैन मुनि शांतिसागर को 2017 के रेप मामले में दोषी करार दिया है।
  • पीड़िता वडोदरा की 19 वर्षीय छात्रा थी, जिसे धार्मिक अनुष्ठान के बहाने बुलाकर धर्मशाला में दुष्कर्म किया गया।
  • घटना 1 अक्टूबर 2017 को तिमलियावद के महावीर दिगंबर जैन मंदिर में हुई थी।
Jain Monk Shantisagar Guilty in Rape Case - Surat News | FirstRajasthan.com

सूरत की एक स्थानीय अदालत ने 2017 में हुए एक रेप केस में जैन मुनि शांतिसागर को दोषी करार दिया है। पीड़िता वडोदरा की रहने वाली 19 वर्षीय कॉलेज छात्रा थी, जिसे आरोपी ने धार्मिक कार्यक्रम के बहाने सूरत बुलाकर दुष्कर्म किया था। इस मामले में सजा का ऐलान आज किया जाएगा, जिसे लेकर अदालत परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

मंदिर धर्मशाला में किया गया था दुष्कर्म

इस मामले की शुरुआत 1 अक्टूबर 2017 को हुई थी, जब पीड़िता को उसके पूरे परिवार के साथ सूरत के नानपुरा इलाके के तिमलियावद स्थित महावीर दिगंबर जैन उप-मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में आमंत्रित किया गया। पीड़ित परिवार लंबे समय से जैन मुनि शांतिसागर के प्रवचनों से प्रभावित था और उनके संपर्क में था।

एफआईआर के अनुसार, उसी रात आरोपी ने लड़की को मंत्र जाप के बहाने अपने कमरे में बुलाया और यह कहते हुए उसे डराया कि अगर उसने बात नहीं मानी, तो उसके परिवार के साथ अनहोनी हो सकती है। इसी डर और दबाव में मुनि ने उसके साथ दुष्कर्म किया।

मेडिकल में पुष्टि के बाद हुई गिरफ्तारी

दूसरे दिन पीड़िता की तबीयत खराब हुई, तब परिवार को मामले की जानकारी मिली। इसके तुरंत बाद अठवालाइंस पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई। मेडिकल जांच में रेप की पुष्टि होते ही पुलिस ने अक्टूबर 2017 में ही शांतिसागर को हिरासत में ले लिया था।

आरोपी का दावा: सहमति से हुए थे संबंध

गिरफ्तारी के बाद शांतिसागर ने पुलिस और डॉक्टर के सामने यह दावा किया था कि लड़की को वह करीब पांच-छह महीने से जानते थे और संबंध आपसी सहमति से बनाए गए थे। मेडिकल जांच के दौरान जब डॉक्टर ने उनसे सवाल किया कि एक साधु होकर उन्होंने ऐसा क्यों किया, तो उन्होंने सिर झुका लिया। यह बयान मेडिको लीगल केस रजिस्टर में दर्ज है।

जानिए, कौन हैं आरोपी मुनि?

आरोपी शांतिसागर का असली नाम गिरराज शर्मा है। उनका बचपन मध्यप्रदेश के गुना जिले में बीता। पिता सज्जनलाल शर्मा कोटा में हलवाई का काम करते थे। गिरराज ने 22 वर्ष की उम्र में मंदसौर में जैन संतों के संपर्क में आने के बाद पढ़ाई अधूरी छोड़ दी और दीक्षा लेकर मुनि शांतिसागर बन गए। वे कई वर्षों से धार्मिक आयोजनों और प्रवचनों के माध्यम से जैन समाज से जुड़े हुए थे।

अदालत ने मुनि को दोषी ठहराते हुए सजा के ऐलान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह देखना अहम होगा कि ऐसे संवेदनशील और धार्मिक पहचान से जुड़े मामले में न्याय व्यवस्था किस प्रकार की सजा सुनाती है। फिलहाल, कोर्ट परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और समाज के विभिन्न वर्गों की इस पर नजर बनी हुई है।

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