- ब्लॉक स्तर पर रहते हुए महिला कर्मचारी को प्रेम जाल में फंसाकर न्यूड फोटो तक मांग चुके।
- जिला स्तर पर पहुंचते ही फिर महिला कर्मचारी को परेशान किया, जांच में दोषी पाए गए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
सिरोही। चित्तौड़गढ़ में शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाले प्रिंसिपल और शिक्षिका का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि सिरोही जिले के चिकित्सा महकमे में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है। एक जिला स्तरीय चिकित्सा अधिकारी पर महिला सहकर्मी को प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित महिला कर्मचारी ने जिला कलेक्टर से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई। कलेक्टर ने जांच कमेटी गठित की, जिसमें अधिकारी दोषी पाए गए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
यह वही चिकित्सा अधिकारी हैं, जो चार साल पहले ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी रहते हुए एक महिला सहकर्मी को प्रेम जाल में फंसाकर न्यूड फोटो मांगने के मामले में चर्चा में आए थे। चित्तौड़गढ़ के स्कूल में रंगरेलियां मनाने वाले प्रिंसिपल और शिक्षिका को राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया था, लेकिन सिरोही में ऐसे अधिकारी को आखिर कौन बचा रहा है?
महिला कर्मचारी को बेवजह परेशान किया
जानकारी के अनुसार, सिरोही जिले के एक जिला स्तरीय चिकित्सा अधिकारी ने अपने ही विभाग में कार्यरत महिला कर्मचारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू किया। महिला ने उनकी मंशा को भांपते हुए तत्काल जिला कलेक्टर से शिकायत की। कलेक्टर ने महिला की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा विभाग की एक विशेष कमेटी से जांच करवाई। जांच में अधिकारी दोषी पाए गए, लेकिन कार्रवाई करने से पहले ही मामला दबा दिया गया। इससे संबंधित पत्रावली सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है।
ब्लॉक अधिकारी रहते भी विवादों में थे
वर्तमान में जिला स्तर पर कार्यरत इस अधिकारी का विवादों से पुराना नाता रहा है। जब वे ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी थे, तब भी एक महिला कर्मचारी से प्रेम संबंध में लिप्त रहे। अधिकारी शादीशुदा हैं, जबकि महिला कर्मचारी भी विवाहित बताई जा रही है। दोनों के बच्चे भी हैं। उस दौरान वायरल हुए मैसेज में अधिकारी की गंदी हरकतें उजागर हुई थीं, जहां उन्होंने महिला से बिना कपड़ों की तस्वीर भेजने की मांग की थी।
जब महिला ने नहाने के बाद की आधी तस्वीर भेजी, तो अधिकारी ने पूरी तस्वीर मांगी। इतना ही नहीं, सरकार की ओर से आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान भी वे महिला से चैटिंग करते पाए गए। वायरल हुई चैट में होटल में मिलने की बातें तक की गई थीं।
प्यार से आगे, फर्जीवाड़े तक पहुंचे
ब्लॉक अधिकारी रहते हुए इस अधिकारी ने न केवल महिला कर्मचारी से प्रेम संबंध बनाए, बल्कि सरकारी कामकाज में भी फर्जीवाड़े की सलाह दी। 11 अक्टूबर 2021 को जब एक एएनएम वैक्सीनेशन के लिए गई और वहां एक भी टीकाकरण नहीं हुआ, तो उसने अधिकारी से पूछा कि अब क्या करें? इस पर अधिकारी ने उसे कागजों में आंकड़े दर्ज करने की सलाह दी।
इसके अलावा, उन्होंने महिला कर्मचारी के प्यार में ऑनलाइन सरकारी कार्यों में भी मदद की। फिर चाहे वह पे-मैट्रिक्स हो या एसएसओ आईडी से जुड़ा कोई अन्य कार्य, सब कुछ यही अधिकारी कर रहे थे।
जांच के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
ब्लॉक स्तर पर विवादों में रहे यह अधिकारी अब जिला स्तर पर भी एक महिला कर्मचारी को प्रताड़ित करने के कारण चर्चा में हैं। सवाल यह उठता है कि जब जांच में दोषी पाए जा चुके हैं, तो फिर उन पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन किसी दबाव में है, या फिर इस अधिकारी को कोई संरक्षण दे रहा है?
सरकार को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर दोषी अधिकारी पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी महिला कर्मचारी कार्यस्थल पर इस तरह की प्रताड़ना का शिकार न हो।