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माघ पूर्णिमा: स्नान, दान और पूजन से मिलेगा महापुण्य, पितृ दोष से मुक्ति का अवसर

  • मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन तीर्थ और नदी में नहाने से पूरे महीने तीर्थ स्नान करने का फल मिल जाता है।
  • इस दिन शिव पूजा का भी बड़ा महत्व है। वहीं पूर्णिमा के दिन भगवान नारायण जल में निवास करते हैं।
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आज माघ पूर्णिमा है। इस दिन को महास्नान पर्व के रूप में भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे पवित्र नदियों में स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।

गंगा स्नान का महत्व

माघ पूर्णिमा को तीर्थ स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन जल में भगवान विष्णु का वास होता है। इस वजह से जो भी व्यक्ति किसी भी पवित्र नदी में स्नान करता है, उसे पूरे माघ मास के स्नान का फल प्राप्त होता है। विशेष रूप से प्रयागराज में संगम स्नान को अत्यंत पुण्यदायक बताया गया है।

व्रत, दान और पूजन का महत्व

इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही भगवान शिव की उपासना का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने और शिव मंत्रों का जाप करने से जीवन की परेशानियां समाप्त होती हैं।

पितृ दोष से मुक्ति का अवसर

माघ पूर्णिमा पर पितृ तर्पण और पितरों की पूजा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पितृ दोष उन लोगों के जीवन में बाधाएं पैदा करता है, जिनके पूर्वजों की आत्मा अशांत मानी जाती है।

पितृ दोष निवारण के लिए करें ये उपाय

सुबह करें ये कार्य:

  • सूर्योदय से पहले स्नान करें और सूर्य को अर्घ्य दें।
  • पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें।
  • शिवलिंग पर जल, दूध, तिल, बेलपत्र और भांग-धतूरा चढ़ाएं।
  • पितृ सूक्त, पितृ चालीसा, गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र और पितृ स्तोत्र का पाठ करें।

शाम को करें ये कार्य:

  • नदी या जलाशय के किनारे दीपदान करें।
  • तुलसी और पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीप जलाएं।
  • ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराएं और दान दें।

धार्मिक मान्यताओं पर आधारित पर्व

माघ पूर्णिमा को लेकर विभिन्न मान्यताएं प्रचलित हैं। हालांकि, यह पूरी तरह से धार्मिक आस्था और लोक परंपराओं पर आधारित है।

Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। पाठक अपने विवेक से निर्णय लें।
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