- शिव पूजा इस बार विशेष ग्रह योग में होगी।
- 149 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ योग बना है।

महाशिवरात्रि, इस वर्ष 26 फरवरी 2025 को बुधवार के दिन, विशेष ग्रह योगों के साथ मनाई जाएगी। शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को लिंग रूप में प्रकट हुए थे। यही कारण है कि महाशिवरात्रि की रात को शिव पूजा का विशेष महत्व है।
149 वर्षों बाद बना ऐसा दुर्लभ ग्रह योग
ज्योतिष उर्वी रावल के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि पर शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में होगा, जहां राहु भी स्थित रहेगा। यह शुभ योग बनाता है। साथ ही सूर्य और शनि कुंभ राशि में रहेंगे।
कुंभ शनि की राशि है, और यहां पिता-पुत्र (सूर्य-शनि) और गुरु-शिष्य (शुक्र-राहु) के योग में शिव पूजा की जाएगी। ऐसा दुर्लभ योग 149 वर्षों बाद आया है, जो 1873 में बना था। उस वर्ष भी महाशिवरात्रि बुधवार को पड़ी थी।
शिव पूजा का महत्व और लाभ
ज्योतिष उर्वी रावल बताती हैं कि इस योग में शिवलिंग की पूजा से भक्तों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। नकारात्मक विचार समाप्त होते हैं और रुके हुए कार्य पूरे होते हैं।
शिवपुराण में कहा गया है कि महाशिवरात्रि की रात जागकर की गई शिव पूजा पूरे वर्ष की पूजा के बराबर फलदायी होती है।
महाशिवरात्रि पर पूजा विधि और व्रत नियम
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सूर्य को जल अर्पित करें।
- गणेश पूजा के बाद शिवलिंग का पंचोपचार पूजन करें।
- व्रत का संकल्प लें और दिनभर फलाहार करें।
- अधार्मिक कार्यों जैसे क्रोध, नशा आदि से बचें।
- शाम और रात को शिवलिंग की पूजा करें।
- “ॐ नम: शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें।
- शिवलिंग पर गन्ने के रस, दही और दूध से अभिषेक करें।
- अगले दिन जरूरतमंदों को भोजन कराकर व्रत समाप्त करें।
महाशिवरात्रि के ग्रह योग का प्रभाव
इस दिन की पूजा से मानसिक शांति, समृद्धि, और शिव की कृपा प्राप्त होती है। एक दुर्लभ और अनोखा ग्रह योग बन रहा है। इस दिन कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शनि और चंद्रमा जैसे चार बड़े ग्रहों का महासंयोग बनेगा। वहीं शुक्र-राहु मीन राशि में रहेंगे। इस विशेष योग का प्रभाव इन राशियों पर खासतौर से दिखाई देगा, जिससे उनके जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं।