सिरोही : पुलिस बनी अपराधियों की ढाल, दर दर भटकते पीड़ित, पर दर्ज नहीं होती रिपोर्ट

सिरोही : पुलिस बनी अपराधियों की ढाल, दर दर भटकते पीड़ित, पर दर्ज नहीं होती रिपोर्ट

  • ड्राइवर ने ट्रेलर वाहन खुर्द बुर्द कर बेच दिया, मालिक का आरोप - थानेदार ने आरोपितों को शह देकर रिश्वत मांगी, और मुकदमा दर्ज नहीं किया

फर्स्ट राजस्थान - सिरोही।

राज्य सरकार और गृह मंत्रालय भले ही राजस्थान प्रदेश में आमजन की सुरक्षा का भरोसा दिला रही हो और कानून व्यवस्था सुदृढ़ करने का लाख दावा कर रही हो, मगर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी हालत बिलकुल उलट है। इन ग्रामीण क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बरक़रार रखने और आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास और अपराधियों के मन में खौफ का ढिंढोरा पीटने की हिदायत दी जा रही हो, लेकिन वास्तव में देखा जाये तो यहाँ हमेशा पीड़ित और निर्दोष लोग ही फंसते है और अपराधी किस्म के लोग बेख़ौफ़ घूमते है। ऐसा ही एक मामला जिले के सरूपगंज थाना क्षेत्र का सामने आया है। जिसमे एक ट्रक मालिक की ट्रक चोरी करने की शिकायत और लाख मिन्नतें करने के बाद भी थानेदार ने चोरी की रिपोर्ट दर्ज नहीं की। अब पीड़ित द्वारा थानाधिकारी पर रिश्वत मांगने, जातिवाद करने और आरोपितों को शह देने जैसे गंभीर आरोप लगाए है। थानाधिकारी से न्याय नहीं मिलने पर पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक सिरोही से भी मदद मांगी लेकिन वहाँ से भी जाँच पुनः सरूपगंज थानाधिकारी को ही दी गयी। पीड़ित अब जाँच दूसरे थाने से करवाने के लिए दर दर की ठोकरे का रहा है।

यह है मामला :
सरूपगंज के ट्रांसपोर्ट व्यवसायी नयी धनारी निवासी गिरीश कुमार पुत्र ललित कुमार पुरोहित ने बताया कि उनका एक वाहन ट्रेलर जिसके नंबर आरजे 19 जीए 1927 था, जिस पर दिनांक 22 मई 2020 को ड्राइवर नयी भावरी निवासी मनीष पुत्र माधोराम कलबी एवं खलासी पृथ्वीराज उर्फ़ रेशम पुत्र माधोराम पुरोहित निवासी नयी धनारी को देकर जेके पुरम बनास स्थित शिवम् ट्रांसपोर्ट पर माल भरने भेजा था। जो अगले दिन वाहन मोती भवन कलोल गुजरात के लिए माल भरकर रवाना हुए। पूर्व में अक्सर कलोल में माल उतारने के बाद वाहन दूसरे दिन तक वापस मेरे पास आ जाता था लेकिन दिनांक 24 मई 2020 को वाहन वापस नहीं आया तो मैंने ट्रक ड्राइवर मनीष कुमार को रात के 9 बजे फ़ोन करके पूछा कि अभी तक क्यों नहीं आये तब मनीष ने मुझे बताया कि वाहन ख़राब हो गया है, ठीक होने में 2,3 दिन लगेंगे। इसके बाद सात दिन का समय निकल गया लेकिन ड्राइवर मनीष कुमार वाहन लेकर ऑफिस नहीं पहुंचा। तब मैंने फिर से मनीष कुमार के मोबाइल पर संपर्क किया लेकिन उसका फ़ोन स्विच ऑफ आने लगा। तब मैंने दिनांक 06 जून 2020 को पुलिस थाना सरूपगंज में ड्राइवर मनीष एवं खलासी रेशम के विरुद्ध शिकायत पेश की। लेकिन थानाधिकारी सरूपगंज भंवरलाल सीरवी ने बजाय मुकदमा दर्ज करने अथवा कोई क़ानूनी कार्रवाई करने के उल्टा मुझे ही हड़काने लगे। थानाधिकारी ने मुझे कहा कि रूपये के बगैर कोई काम नहीं होता, ऐसी रिपोर्ट तो कई आती है।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि उसका अप्रार्थी ड्राइवर मनीष सीरवी एवं थानाधिकारी एक ही जाती से है जिसके चलते थानाधिकारी जातिवाद की भावना रखते हुए जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे है और मामला लंबित होने से मेरा वाहन भी मेरे हाथ से जा चुका है और मेरे दस लाख रूपये का नुकसान हुआ है।

एस पी सिरोही से भी लगाई न्याय की गुहार :
पीड़ित गिरीश ने थानाधिकारी द्वारा इस मामले में मुकदमा दर्ज नहीं करने के बाद पुलिस अधीक्षक सिरोही को दिनांक 25 जून 2020 को रिपोर्ट दी। जिस पर पुलिस अधीक्षक ने आदेश जारी कर आरोपितों के विरुद्ध मुक़दमा दर्ज करने की आज्ञा दी लेकिन थानाधिकारी सरूपगंज ने पुलिस अधीक्षक के आदेशों की भी अवहेलना की और कोई कार्रवाई नहीं की।

आखिर लेनी पड़ी न्यायलय की शरण :
इसके बाद पीड़ित ने न्यायलय की शरण ली और दिनांक 03 जुलाई 2020 को श्रीमान न्यायिक मजिस्ट्रेट पिंडवाड़ा के समक्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 120 बी के तहत दोनों अप्रार्थीगणो के विरुद्ध परिवाद पेश किया। जो कायमी मुकदमा व अनुसन्धान हेतु न्यायलय से पुलिस थाना सरूपगंज भिजवाया गया।

जाँच दूसरे थाने से करवाने की गुहार :
पीड़ित गिरीश ने आरोप लगाया कि इस मामले की जांच वापस घूम फिरकर सरूपगंज थाने में ही चल रही है। थानाधिकारी इसमें मुझे न्याय नहीं मिलने देंगे जिससे जाँच अन्य थाने से करवाने कि मांग की है।

इनका कहना है :

गिरीश कुमार जब शुरुआत में रिपोर्ट लेकर थाने आया था तब मैं अवकाश पर था। मुझे मिला ही नहीं वो और सीधे आगे चला गया। अब मुकदमा भी दर्ज हो गया है और इस मामले में अनुसन्धान जारी है।
- भंवरलाल सीरवी, थानाधिकारी सरूपगंज।