जालोर : भावुक कर गया बिछड़ी बेटियों से पिता के मिलन का पल

जालोर : भावुक कर गया बिछड़ी बेटियों से पिता के मिलन का पल

  • मध्यप्रदेश के सिंगरौली में जिला प्रशासन की मौजूदगी में बिछड़ी बेटियों को किया उनके पिता को सुपुर्द

फर्स्ट राजस्थान @ जालोर।

जिले के उम्मेदाबाद से मिली मध्यप्रदेश के सिंगरौली की आदिवासी जनजाति की बालिकाओं की सकुशल घर वापसी पर उनके परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिला प्रशासन की मौजूदगी में बाल कल्याण समिति सिंगरौली ने शुक्रवार देर शाम को जब बालिकाओं को इनके पिता को संरक्षण में सुपुर्द किया तो वहां खड़ा हर शख्स भावुक हो गया।

गौरतलब है कि जालोर में गत पांच जून को इन बालिकाओं को बाल कल्याण समिति ने संरक्षण में लेने के बाद इन्हें सावित्रीबाई फूले कॉलेज स्तरीय छात्रावास स्थित विशेष क्वारंटाइन सेंटर(बालिका) में रखा था। इन बालिकाओं के वास्तविक निवास स्थान व इनकी सामाजिक जांच रिपोर्ट के लिए बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष नैनसिंह राजपुरोहित, सदस्य रमेशकुमार मेघवाल व मोड़सिंह काबावत ने मध्यप्रदेश के सिंगरौली की बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सुरेशमणि तिवारी से सम्पर्क किया। वहां से वास्तविक जानकारी एकत्रित करने के बाद अध्यक्ष सुरेशमणि तिवारी व महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रवेश मिश्रा ने वहां के जिला कलक्टर राजीव रंजन मीणा को इस प्रकरण से अवगत करवाया व जालोर सीडब्ल्यूसी को भी सूचित किया। वहां से जिला कलक्टर मीणा ने इस प्रकरण में जालोर जिला कलक्टर से दूरभाष पर वार्ता की। मध्यप्रदेश की पूरी जानकारी मिलने पर जालोर बाल कल्याण समिति ने बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक राजेन्द्र पुरोहित के साथ जालोर जिला कलक्टर हिमांशु गुप्ता को सारी स्थिति व घटनाक्रम से अवगत करवाया। जिस पर उन्होंने संवेदनशीलता दर्शाते हुए सिंगरौली जिला कलक्टर राजीव रंजन मीणा से बात कर बालिकाओं के पुनर्वास की कार्यवाही शुरू करवाई। जिला कलक्टर के मार्गदर्शन में बाल कल्याण समिति ने इन बालिकाओं को पुलिस सुरक्षा के साथ विशेष वाहन से सिंगरौली रवाना किया। जहां शुक्रवार देर शाम को जालोर से गए पुलिस टीम के भंवरलाल विश्नोई, राजेन्द्र बेनीवाल, कमला विश्नोई व भगवती विश्नोई ने इन बालिकाओं को वहां की बाल कल्याण समिति को संरक्षण के लिए सुपुर्द किया। वहीं देर शाम को सिंगरौली में वहां के जिला कलक्टर राजीव रंजन मीणा, पुलिस अधीक्षक बीरेन्द्रकुमारसिंह, बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रवेश मिश्रा समेत अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों की मौजूदगी में इन बालिकाओं को उनके पिता को संरक्षण में देने की कार्यवाही की गई। अपनी खोई बेटियों के मिलन पर उनके पिता की आंखे छलक आई।

उत्तरप्रदेश के औबरा से जुड़े है तार
मध्यप्रदेश से जालोर तक पहुंची इन बालिकाओं के तार उत्तरप्रदेश के सोनभद्र जिले के औबरा क्षेत्र से जुड़े हुए है। यह मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र का सीमावर्ती क्षेत्र है। उस क्षेत्र में ऐसे कई गिरोह सक्रिय है, जो गरीब व आदिवासी बालिकाओं को बहला फुसलाकर व लोभ लालच देकर देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाकर ऊंचे दाम में बेचते है। इनके चंगुल में फंसने के बाद बालिकाओं ेकी घर वापसी मुश्किल हो जाती है। कई बार इन्हेंं से एक से अधिक बार एजेंट के माध्यम से बेचा जाता है।

यह था मामला
गत पांच जून को कोतवाली पुलिस ने उम्मेदाबाद में मिली मध्यप्रदेश की सिंगरौली जिले की दो बालिकाओं को बाल कल्याण समिति जालोर के समक्ष पेश किया था। इन बालिकाओं को बाल कल्याण समिति ने संरक्षण में लेने के बाद इन्हें सावित्रीबाई फूले कॉलेज स्तरीय छात्रावास स्थित विशेष क्वारंटाइन सेंटर में रखा था। जहां क्वारंटाइन अवधि के दौरान इन्हें पारिवारिक और मैत्रीपूर्ण वातावरण उपलब्ध करवाया गया और इनकी नियमित काउंससिंग की गई। जिस पर इन बालिकाओं ने आपबीती बताई थी। जिसके आधार पर कोतवाली थाने में बिना नम्बरी एफआईआर दर्ज कर सोजत सिटी पुलिस थाने भेजी गई थी। जहां इस प्रकरण में अनुसंधान जारी है।

इनका कहना…

जालोर जिला कलक्टर हिमांशु गुप्ता ने संवेदनशीलता दर्शाते हुए इन बालिकाओं के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू करवाई थी। जिसके तहत बालिकाओं को विशेष वाहन से मध्यप्रदेश के सिंगरौली भेजा गया। वहां के जिला कलक्टर राजीव रंजन मीणा की मौजूदगी में इन बालिकाओं को उनके परिजनों को सुपुर्द किया गया। जिला कलक्टर के मार्गदर्शन व सभी के सहयोग से ही बिछड़ी बेटियों को उनके परिजनों से मिलाने का यह पुनीत कार्य संभव हो पाया है।
- नैनसिंह राजपुरोहित, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति जालोर